क्या आप जानते हैं कि अगर आपका बच्चा सोशल मीडिया पर बहुत अधिक समय बिता रहा है तो उसकी इस आदत के चलते उनमें भोजन संबंधी विकार (eating disorder) विकसित हो सकता है। इस समस्या के नतीजे तुरंत तो सामने नहीं आते मगर इसके असर बेहद ख़राब होते हैं।
एक हालिया अध्ययन में सोशल मीडिया के उपयोग और अव्यवस्थित खान-पान की आदतों के जोखिम के बीच संबंध का का खुलासा किया गया है।
अध्ययन से पता चलता है कि सोशल मीडिया को दिया जाने वाला हर अतिरिक्त घंटा, खाने संबंधी विकार के लक्षण से जुड़ा हुआ है। ऐसे में जो किशोर या युवा वयस्क ऑनलाइन अधिक समय बिताते हैं, उनके साइबर उत्पीड़न का शिकार होने की संभावना अधिक होती है। इनकी यह आदत भोजन संबंधी विकारों का कारण बन सकती है।
विशेषज्ञों का कहना है कि भोजन विकार के जोखिम और सोशल मीडिया के उपयोग के बीच संबंध बहुआयामी है और माता-पिता द्वारा स्वयं और अपने बच्चों की सुरक्षा के तरीके अलग-अलग हो सकते हैं।
सैन फ्रांसिस्को स्थित कैलिफोर्निया विश्वविद्यालय के बाल रोग के एसोसिएट प्रोफेसर डॉक्टर जेसन नागाटा का कहना है कि एक समय में एक से अधिक वीडियो देखने से खान-पान की आदतों पर असर पड़ सकता है।
उन्होंने कहा कि सोशल मीडिया के प्रत्येक अतिरिक्त घंटे के उपयोग से एक वर्ष बाद भोजन संबंधी विकार विकसित होने का जोखिम 62 प्रतिशत बढ़ जाता है।
सितंबर में किए गए एक अध्ययन से पता चला है कि स्क्रीन टाइम और सोशल मीडिया के इस्तेमाल का हर अतिरिक्त घंटा खाने के विकार के लक्षण दिखाने की अधिक संभावना से जुड़ा है।
2023 के एक अध्ययन के अनुसार, जो किशोर ऑनलाइन ज़्यादा समय बिताते हैं, उनमें साइबरबुलिंग का अनुभव होने की संभावना अधिक होती है, जो खाने के विकार का एक और जोखिम कारक है।
विशेषज्ञों का कहना है कि भोजन विकार के जोखिम और सोशल मीडिया के उपयोग के बीच संबंध बहुआयामी है और माता-पिता द्वारा स्वयं और अपने बच्चों की सुरक्षा के तरीके अलग-अलग हो सकते हैं।