हिंदी के प्रख्यात साहित्यकार विनोद कुमार शुक्ल का रायपुर एम्स में बीते दिन निधन हो गया। ज्ञानपीठ पुरस्कार से सम्मानित उपन्यास एवं कवी के एक चर्चित उपन्यास पर फिल्म भी बन बनाई गई।

विनोद कुमार शुक्ल के मुख्य उपन्यासों में ‘दीवार में एक खिड़की रहती थी’ , ‘नौकर की कमीज’ और ‘खिलेगा तो देखेंगे’ शामिल हैं। ‘नौकर की कमीज’ पर हिंदी सिनेमा में फिल्म बन चुकी है।
साहित्यकार का उपन्यास ‘नौकर की कमीज’ साल 1979 में आया। फिल्मकार मणि कौल ने इस पर बॉलीवुड फिल्म बनाई। इस फिल्म में उच्च वर्ग द्वारा निचले तबके के बीच के शोषण को दिखाया गया है। हालाँकि फिल्म ‘नौकर की कमीज’ भारत में रिलीज हुई थी। इसके अलावा मुख्य रूप से इस फिल्म को 30 सितंबर 1999 को नीदरलैंड्स में भी रिलीज किया गया था।
फिल्म ‘नौकर की कमीज’ में पंकज सुधीर मिश्रा, अनु जोसेफ और ओम प्रकाश द्विवेदी जैसे कलाकार महत्वपूर्ण भूमिकाओं में नजर आए थे। फिल्म में सामिर अहमद, वीकृष्णा और वीना मेहता ने भी काम किया था।
हिंदी साहित्य जगत में विनोद कुमार शुक्ल के अद्वितीय योगदान, विशिष्ट लेखन शैली और सृजनात्मकता के लिये साल 2024 में 59वां ज्ञानपीठ पुरस्कार से सम्मानित किया गया था। वे छत्तीसगढ़ के पहले लेखक हैं, जिन्हें इस सम्मान से पुरस्कृत किया गया है। प्रकाशन ‘हिंद युग्म’ की तरफ से महज छह महीने में विनोद कुमार शुक्ल को 30 लाख रुपये की रायल्टी दिए जाने की खबर ने हिंदी साहित्य जगत में खलबली मचा दी थी।
बताते चलें कि प्रसिद्ध उपन्यासकार, लेखक और कवि विनोद कुमार शुक्ल का 89 वर्ष की उम्र में रायपुर एम्स में निधन हो गया। वह पिछले कुछ दिनों से वेंटिलेटर पर थे। उन्हें सांस लेने में दिक्कत के कारण वेंटिलेटर में ऑक्सीजन सपोर्ट पर रखा गया था।
उनके यादगार लेखन की बात करें तो साल 1979 में उनके उपन्यास ‘नौकर की कमीज’, ‘खिलेगा तो देखेंगे (वर्ष 1996), ‘दीवार में एक खिड़की रहती थी’ (वर्ष 1970), ‘हरी घास की छप्पर वाली झोपड़ी’ और बौना पहाड़ (वर्ष 2011), ‘यासि रासा त'(वर्ष 2016) और ‘एक चुप्पी जगह’ (वर्ष 2018) प्रकाशित हुईं।
उनका पहला कविता संग्रह ‘लगभग जय हिन्द’ साल 1971 में प्रकाशित हुआ था। साल 2023 में उन्हें अंतरराष्ट्रीय साहित्य में उपलब्धि के लिए 2023 का पेन/नाबोकोव पुरस्कार के लिए चुना गया था। वे भारतीय एशियाई मूल के पहले लेखक थे, जिन्हें इस सम्मान से नवाजा गया था।










