वैज्ञानिकों ने आर्कटिक महासागर के नीचे एक छिपी हुई समुद्री दुनिया खोजी है। यह एक ऐसी समुद्री दुनिया है जो गहरे समुद्र में जीवन और पृथ्वी में कार्बन को समुद्र से 4 किमी नीचे जीवन का एक अनोखाऔर भरपूर इकोसिस्टम मिला है।

अंतर्राष्ट्रीय मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, यह नया खोजा गया इकोसिस्टम समुद्र की सतह से बहुत नीचे, पूरी तरह अंधेरे और बहुत ज़्यादा ठंड में है, फिर भी यहां जीवन मौजूद है। अनुमान है कि इन नतीजों से गहरे समुद्र में माइनिंग और समुद्री संरक्षण के बारे में इंटरनेशनल पॉलिसी के फैसले लेने में मदद मिल सकती है।
इंटरनेशनल साइंटिस्ट्स ने इस इलाके को एक्सप्लोर करने के लिए ऑरोरा नाम की एक रिमोट से चलने वाली गाड़ी का इस्तेमाल किया। उन्होंने जमे हुए मीथेन और तेल के कोन देखे, जिनमें से कुछ छह मीटर तक चौड़े थे और गैस के बुलबुले निकाल रहे थे।
समुद्री दुनिया की खोज इसलिए ख़ास हो जाती है क्योंकि यह ग्लोबल क्लाइमेट साइंस की समझ और आर्कटिक महासागर के समुद्र तल से मिनरल्स निकालने से जुड़े सवालों पर असर डालती है।
इस अनोखे इकोसिस्टम की खोज वैज्ञानिकों की एक टीम ने की है। टीम ने अब तक खोजे गए सबसे गहरे मीथेन हाइड्रेट टीलों की पहचान की, जिन्हें ‘फ्री माउंड्स’ नाम दिया गया। ये टीले ग्रीनलैंड सागर में मोलॉय रिज पर, आर्कटिक महासागर के नीचे, समुद्र तल से लगभग ढाई मील नीचे हैं।
यह रिसर्च पिछले महीने साइंटिफिक जर्नल नेचर कम्युनिकेशंस में पब्लिश हुई थी और इसे आर्कटिक यूनिवर्सिटी ऑफ़ नॉर्वे (UiT) ने शेयर किया था। स्टडी से पता चलता है कि गैस हाइड्रेट्स, जो बर्फ जैसी बनावट होती है जिसमें मीथेन, दूसरी गैसें और कच्चा तेल होता है, सीधे आर्कटिक समुद्र तल से निकलते हैं, जो गहरे समुद्र में रहने वाले जीवों के एक रिच इकोसिस्टम को सपोर्ट करते हैं। बताते चलें कि यहां के जीव बिना सूरज की रोशनी के ज़िंदा रहते हैं और केमिकल एनर्जी पर निर्भर रहते हैं।















