अर्थ आवर पर गैर ज़रूरी लाइट बंद करके दुनिया में दिया जागरूकता का सन्देश

बीती रात भारत सहित दुनियाभर के शहरों में अर्थ आवर मनाया गया। इस तरह से ऊर्जा संरक्षण के लिए एक छोटी सी कोशिश को अंजाम दिया जाता है। अर्थ आवर मनाने का मतलब केवल गैर ज़रूरी बत्ती बंद करना नहीं है। यह मानसिक रूप से तनावमुक्त करने के साथ कुदरत के समीप लाने का प्रयास करता है।

अर्थ आवर मनाने के कई तरीके हो सकते हैं और ज़रूरी नहीं है इसके लिए आप किसी समूह का जमावड़ा करें, बल्कि अकेले रहते हुए भी सीमे शामिल हुआ जा सकता है। इसमें शामिल होकर पर्यावरण के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दिखने का मौक़ा मिलता है। साथ ही जलवायु परिवर्तन और पर्यावरण स्थिरता के बारे में लोगों और संस्थाओं की जागरूकता सन्देश देना सरल हो जाता है।

अर्थ आवर की शुरुआत 2007 में ऑस्ट्रेलिया के सिडनी, न्यू साउथ वेल्स, ऑस्ट्रेलिया में एक बत्तियाँ बंद करने के कार्यक्रम के रूप में हुई थी। यह डब्ल्यूडब्ल्यूएफ यानी विश्व वन्यजीव कोष द्वारा आयोजित एक वार्षिक वैश्विक पर्यावरण आंदोलन है, जिसे हर साल मार्च के आखिरी शनिवार को रात 8:30 से 9:30 बजे तक मनाया जाता है। इस दौरान लोग घर और ऑफिस की गैर-जरूरी लाइटें एक घंटे के लिए बंद करते हैं। ऐसा करते हुए यह लोग ऊर्जा संरक्षण और जलवायु परिवर्तन के प्रति जागरूकता का संदेश देते हैं।

भारत में भी राजधानी दिल्ली सहित कई शहरों में अर्थ आवर मानाने जाने की ख़बरें मिली हैं। समय शुरू होते ही दिल्ली के इंडिया गेट की बिजली बंद कर दी गई। इसके साथ ही जयपुर, हैदराबाद, मुंबई के अलावा कई शहरों से अर्थ आवर मनाए जाने की ख़बरें सामने आई हैं।

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