वर्ष 2025 में लगभग हर 14 मिनट में एक आम नागरिक की जान गई है। यह जानकारी आपात राहत मामलों के लिए यूएन कार्यालय (OCHA) में संकट प्रतिक्रिया प्रभाग की निदेशक, ऐडेम वोसोर्नू ने सशस्त्र टकरावों में आम नागरिकों के संरक्षण पर आयोजित बैठक में दी।
विश्व के अनेक इलाक़ों में चल रहे हिंसक टकरावों में हताहत हो रहे आम नागरिकों, मानवीय सहायताकर्मियों व स्वास्थ्य केन्द्रों पर हमलों और विशाल पैमाने पर घरों व बुनियादी ढाँचे के विध्वंस पर उपजी चिन्ताओं के बीच, इसी विषय पर बुधवार को सुरक्षा परिषद की वार्षिक बैठक हुई है।
संयुक्त राष्ट्र की वरिष्ठ अधिकारी ने सदस्य देशों से यूएन चार्टर को सर्वोपरि रखने और अन्तरराष्ट्रीय मानवतावादी क़ानून के लिए सम्मान सुनिश्चित करने का आग्रह किया है। उन्होंने कहा कि दुनिया भर में 20 सशस्त्र टकराव जारी हैं, जिनमें 37 हज़ार से अधिक आम नागरिक मारे गए, जबकि वास्तविक आँकड़ा इससे कहीं अधिक होने की आशंका है, चूँकि यह मृतक संख्या केवल उन मामलों की हैं, जिनमें संयुक्त राष्ट्र जानकारी जुटा पाया है। OCHA निदेशक ने कहा कि यौन हिंसा को बड़े पैमाने पर अब भी अंजाम दिया जा रहा है।
काँगो लोकतांत्रिक गणराज्य, सूडान, यूक्रेन, क़ाबिज़ फ़लस्तीनी इलाक़ा और उससे परे तक, हिंसक टकराव में अपनी जान गँवाने वाले या घायल होने वाले आम नागरिकों की वास्तविक संख्या इससे कहीं अधिक होने की आशंका है।
ऐडेम वोसोर्नू ने सशस्त्र टकरावों में आम नागरिकों के संरक्षण पर आयोजित बैठक में सदस्य देशों के प्रतिनिधियों को बताया कि बीते एक वर्ष में, उन्होंने युद्ध का दंश झेल रहे देशों में बड़े पैमाने पर बर्बादी को देखा है। जहाँ बच्चों, आम नागरिकों को घरों, स्कूलों, बाज़ारों, कार्यस्थलों, सड़कों पर मारा गया। जब वे सुरक्षा की तलाश में भाग रहे थे। ऐडेम वोसोर्नू ने क्षोभ जताया कि अक्सर ऐसा हुआ कि वे हमलों की चपेट में नहीं आए थे, बल्कि उन्हें भी निशाना बनाया गया था।
सुरक्षा परिषद ने वर्ष 2016 में प्रस्ताव 2286 को पारित किया था, जोकि सशस्त्र टकरावों में स्वास्थ्य देखभाल सेवाओं की सुरक्षा पर केन्द्रित है. मगर, उसके बाद से ही स्थिति निरन्तर बिगड़ती गई है।