विश्व स्वास्थ्य संगठन के एक नए अध्ययन से पता चला है कि मेनोपॉज के बाद हृदय रोग से पीड़ित महिलाओं में अधिक वजन होना ब्रेस्ट कैंसर का खतरा बढ़ा सकता है।

अमरीकन कैंसर सोसाइटी के जर्नल ‘कैंसर’ में सोमवार को प्रकाशित इस स्टडी के अनुसार, जिन महिलाओं का बॉडी मास इंडेक्स (बीएमआई) ज़्यादा होता है, उनमें स्तन कैंसर का खतरा पहले से ही अधिक होता है।
पिछले दिनों ‘नेचर कम्युनिकेशंस’ जर्नल की प्रकाशित एक रिपोर्ट बताती है कि अधिक वजन वाली महिलाओं में बड़े ट्यूमर और एडवांस्ड स्टेज का ब्रेस्ट कैंसर होने के आसार अधिक होते हैं।
अध्ययन बताता है कि जिन महिलाओं का बॉडी मास इंडेक्स (बीएमआई) ज़्यादा होता है, उनमें स्तन कैंसर का खतरा पहले से ही अधिक होता है। हालाँकि टाइप-2 डायबिटीज का इस खतरे पर कोई खास असर नहीं देखा गया। इस हवाले से कहा जा सकता है कि डायबिटीज वाली और बिना डायबिटीज वाली महिलाओं में अधिक बीएमआई से ब्रेस्ट कैंसर का जोखिम समान रूप से बढ़ता है।
संगठन की कैंसर रिसर्च विंग, इंटरनेशनल एजेंसी फॉर रिसर्च ऑन कैंसर के शोधकर्ता हेंज फ्रीस्लिंग विस्तार से बताते हुए कहते हैं कि इस अध्ययन के नतीजे ब्रेस्ट कैंसर स्क्रीनिंग प्रोग्राम को बेहतर बनाने में मदद कर सकते हैं। आगे वह इस पर सुझाव भी देते हैं कि भविष्य में वजन घटाने के ट्रायल में हृदय रोग वाली महिलाओं को शामिल करके ब्रेस्ट कैंसर रोकथाम पर शोध किया जाना चाहिए।
इस अध्ययन के लिए शोधकर्ताओं ने यूरोपियन प्रोस्पेक्टिव इन्वेस्टिगेशन इनटू कैंसर एंड न्यूट्रिशन और यूके बायोबैंक के सहयोग से 168,547 मेनोपॉज महिलाओं के डेटा का विश्लेषण किया। अध्ययन शुरू होने पर इन महिलाओं को न तो टाइप-2 डायबिटीज थी और न ही हृदय रोग। लगभग एक दशक के फॉलो-अप के बाद, 6,793 मेनोपॉज के बाद की महिलाओं में स्तन कैंसर पाया गया।।
अध्ययन से यह भी पता चला कि अधिक वजन और हृदय रोग का एक साथ होना हर साल प्रति 100,000 लोगों में 153 अतिरिक्त ब्रेस्ट कैंसर के मामले पैदा कर सकता है।
अध्ययन बताता है कि ज़्यादा वजन और दिल की बीमारी का एक साथ होना हर साल प्रति 100,000 लोगों में 153 अतिरिक्त ब्रेस्ट कैंसर के मामलों के लिए ज़िम्मेदार हो सकता है।
याद दिलाते चलें कि पहले हुए शोध से यह नतीजे सामने आये हैं कि मोटापा 12 तरह के कैंसर के खतरे को बढ़ाता है। इनमें गर्भाशय, किडनी, लिवर और कोलोरेक्टल कैंसर बेहद आम हैं।
