अर्बन ग्रीन पॉलिसी के तहत बनने वाली ‘अल्टीमेट ग्रीन सिटी’ में आधा हो जाएगा एयर कंडीशन लोड

उत्तर प्रदेश कैबिनेट ने शुक्रवार को नगर विकास विभाग द्वारा प्रस्तावित शहरी हरित नीति को मंजूरी प्रदान कर दी है। नगर विकास विभाग ने सरकारी, सामुदायिक और व्यक्तिगत सहभागिता के समन्वय से शहरों के आवरण को हरा-भरा बनाने की कवायद शुरू की है। इसे अमलीजामा पहनाने के लिए अर्बन ग्रीन पॉलिसी को मंजूरी दी गई है। विभाग ने इसकी कार्ययोजना और लक्ष्य तय कर निकायों व संबंधित विभागों को भेज दिए हैं।

अर्बन ग्रीन पॉलिसी के तहत बनने वाली ‘अल्टीमेट ग्रीन सिटी’ में आधा हो जाएगा एयर कंडीशन लोड

एयर क्वालिटी की समस्या का सामना करने और शहरों के ‘फेपड़ों’ को स्वस्थ बनाने के लिए सरकार अर्बन ग्रीन पॉलिसी लागू कर रही है। नीति के अनुसार यदि मानकों के तहत निकाय ‘अल्टीमेट ग्रीन सिटी’ बन गए तो एयर कंडीशन का खर्च आधा हो जाएगा।

एनसीएपी यानी राष्ट्रीय वायु स्वच्छता कार्यक्रम की रिपोर्ट से पता चलता है कि मिलियन प्लस शहरों में लखनऊ सहित कानपुर, आगरा, मेरठ, वाराणसी और प्रयागराज खराब एयर क्वॉलिटी की समस्या झेल रहे हैं। वहीँ नॉन मिलियन प्लस शहरों की बात करें तो इसमें गोरखपुर के अलावा बरेली, रायबरेली, मुरादाबाद, खुर्जा, फिरोजाबाद और झांसी की शहरों में होती है जहाँ एयर क्वॉलिटी की चुनौतियां हैं।

प्रदेश में जलवायु परिवर्तन के प्रभावों को कम करने और पर्यावरण संरक्षण की दिशा में सरकार कई महत्वपूर्ण कदम उठाएगी। हरित नीति के तहत रूफटॉप गार्डन से लेकर ग्रीन सिटी तक प्रदेश के शहरों को नया रूप देने की योजना है। तीन-स्तरीय रणनीति अपनाई जाएगी, जिसमें शहर, मोहल्ला और भवन स्तर पर हरित पहलों को बढ़ावा दिया जाएगा।

इसके लिए पर्यावरण में सुधार के साथ ग्रीन बेल्ट में बढ़ोतरी और विकास के संतुलन के लिए नियमन व जागरूकता दोनों ही पक्षों पर काम किया जाएगा। योजना को प्रभावी बनाने के लिए निकाय, कैंपस और बिल्डिंग तीनों ही स्तर पर अलग-अलग रणनीति लागू की जाएगी।

इन सभी कामों को अमलीजामा पहनाने के लिए नगर विकास विभाग सहित नौ विभाग मिलकर काम करेंगे। इसमें सिटी ट्रांसपोर्ट, आवास व शहरी नियोजन, शिक्षा, पर्यावरण व वन विभाग, उद्यान, लोक निर्माण, एनएचएआई, कैंटोनमेंट व नियोजन विभाग सम्मिलित हैं। इनके बेहतर समन्वय के लिए कमिटी भी बनाई जाएगी।

ग्रीन रेटिंग के अलग-अलग मानकों को हासिल करने के लिए काम शुरू करने से पहले शहरी निकाय के संसाधन व पर्यावरण के सेहत की पड़ताल की जाएगी। सर्वप्रथम ग्रीन एरिया का सर्वे कराया जाएगा।

जैव विविधता का डॉक्युमेंटेशन होगा। लैंड मैपिंग के अलावा सड़कों के किनारे लगे पौधों से लेकर पार्कों तक के पौधों के स्वास्थ्य का आकलन किया जाएगा। शहरी क्षेत्रों में हॉटस्पॉट के बाद इसका वर्गीकरण किया जायेगा जिसमे सर्वाधिक प्रदूषण, घनी आबादी और न्यूनतम ग्रीन एरिया को वर्गीकृत किया जाएगा।

इसके तहत उन क्षेत्रों को भी चिन्हित किया जाएगा जहाँ मिट्टी का कटाव होता है।इसके लिए जियोग्राफिक इनफार्मेशन सिस्टम ( GIS), सैटलाइट इमेज ऐंड ग्राउंड सर्वे तीनों का उपयोग किया जाएगा। साथ ही अधिक तापमान वाले क्षेत्रों को हीट आइलैंड के तौर पर चिह्नित किया जाएगा।

बेसलाइन सर्वे के बाद सभी निकायों को ग्रीन रेटिंग की कवायद में शामिल करने के लिए सभी स्टॉक होल्डर्स को चिन्हित किया जाएगा। नए व वर्तमान पार्कों के विकास के अलावा शहर के चारो ओर ग्रीन बेल्ट विकसित किया जाएगा। इसमें उन एरिया पर फोकस किया जाएगा जहां सर्वाधिक ट्रैफिक है।

सड़कों के किनारे भी ग्रीन एरिया बढ़ाने व उसे संरक्षित करने के अलावा निकाय स्तर पर अर्बन फॉरेस्ट विकसित करने का काम भी होगा। साथ ही पॉर्क, गार्डन को गोद लेकर उसका विकास किया जाएगा। ग्रीन इन्फ्रास्ट्रक्चर सहित सिटी फ्लावर फेस्टिवल, ग्रीन वॉल, वर्टिकल गार्डन जैसी पहल को प्रोत्साहित किया जाएगा।

बारिश के पानी को संरक्षित करने के लिए स्पंज पार्क विकसित होंगे। नागरिकों को नि:शुल्क पौधे, खाद आदि भी उपलब्ध करवाने का प्रस्ताव है। सामुदायिक और व्यक्तिगत भागीदारी के लिए ग्रीन रूफ, रूफटॉप गार्डन, किचन गार्डन विकसित करने के विशेष अभियान चलाए जाएंगे।

निकायों की ग्रीन रेटिंग के ज़रिए किए गए प्रयासों का प्रभाव मापा जाएगा। सभी मानकों को पूरा करने वाले शहर को अल्टीमेट ग्रीन सिटी का दर्जा दिया जाएगा।

निकाय के निवासियों, स्थानीय प्राधिकरणों से फीडबैक के आधार पर अल्टीमेट ग्रीन सिटी तय की जाएगी। इंटरनल कमिटी के मूल्यांकन के साथ थर्ड पार्टी ऑडिट को भी आधार बनाया जाएगा।

पॉलिसी के दावों के मुताबिक़ के मुताबिक़, अल्टीमेट ग्रीन सिटी विकसित होने पर हीट आइलैंड वाले क्षेत्रों में तापमान में भारी कमी पर ऐसी का लोड आधा हो सकता है। साथ ही बायोडायवर्सिटी, सौंदर्यीकरण और जल स्तर में सुधार भी संभव हो सकेगा।

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