फिलिस्तीनी हेडस्कार्फ़ पर प्रतिबंध के बाद लेखिका झुम्पा लाहिड़ी ने ठुकराया नोगुची संग्रहालय पुरस्कार

पुलित्जर पुरस्कार विजेता अमरीकी लेखिका झुम्पा लाहिड़ी ने न्यूयॉर्क के प्रतिष्ठित संग्रहालय से एसामु नोगुची पुरस्कार लेने से इनकार कर दिया है।

फिलिस्तीनी हेडस्कार्फ़ पर प्रतिबंध के बाद लेखिका झुम्पा लाहिड़ी ने ठुकराया नोगुची संग्रहालय पुरस्कार

अमरीकी मीडिया के मुताबिक, न्यूयॉर्क के एसामु नोगुची संग्रहालय ने हाल ही में अपनी वर्दी नीति में बदलाव के बाद फिलिस्तीनी स्कार्फ पहनने के लिए तीन कर्मचारियों को निकाल दिया था।

इस कदम के विरोध में, पुलित्जर पुरस्कार विजेता लेखिका झुम्पा लाहिड़ीने एसामु नोगुची संग्रहालय द्वारा दिए जाने वाले पुरस्कार को स्वीकार करने से इनकार कर दिया है।


इज़राइल-हमास युद्ध की शुरुआत के बाद, फ़िलिस्तीनी स्कार्फ ‘कुफिय्या’ दुनिया भर में फ़िलिस्तीनी स्वतंत्रता के अधिकार का प्रतीक बन गया और इसे पहनना फ़िलिस्तीनियों के साथ एकजुटता की अभिव्यक्ति माना जाता है।


झुम्पा लाहिड़ी ने गाजा में फलस्तीनियों के प्रति एकजुटता दिखाने के लिए ‘कुफिय्या’ पहनने वाली उन तीन कर्मचारियों को निकाले जाने के विरोध में अमरीका के क्वींस स्थित नोगुची संग्रहालय से पुरस्कार लेने से इनकार किया है। लाहिड़ी के साथ कोरियाई मूल के चित्रकार, मूर्तिकार एवं कवि ली उफान को इसामु नोगुची पुरस्कार मिलना था।

संग्रहालय ने पिछले महीने अपनी घोषणा में कहा था कि कर्मचारी अपने काम के घंटों के दौरान ‘‘राजनीतिक संदेश, नारे या प्रतीक’’ व्यक्त करने वाले कपड़े अथवा कोई अन्य चीज नहीं पहन सकते।

संग्रहालय के एक प्रवक्ता ने एक बयान में कहा- ‘झुम्पा लाहिड़ी ने हमारी ड्रेस कोड नीति के खिलाफ एसामु नोगुची पुरस्कार 2024 स्वीकार करने से इनकार कर दिया है। हम उनके नज़रिए का सम्मान करते हैं और हम जानते हैं कि हमारी नीति हर किसी के दृष्टिकोण के अनुरूप नहीं हो सकती है।’

बताते चलें कि 57 वर्षीय लेखिका झुम्पा लाहिड़ी को उनकी किताब ‘इंटरप्रेटर ऑफ मैलाडीज’ (Interpreter of Maladies) के लिए 2000 में पुलित्जर पुरस्कार से सम्मानित किया गया था।

दक्षिण अफ्रीका में रंगभेद के खिलाफ लंबे समय तक लड़ने वाले नेल्सन मंडेला को भी कई मौकों पर यह स्कार्फ पहने देखा गया था। दूसरी ओर, इजरायल समर्थकों का मानना ​​है कि फिलिस्तीनी हिजाब चरमपंथ के समर्थन का प्रतीक है।

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