जंगलों की कटाई से वातावरण में बढ़ रहा है मरकरी के प्रदूषण का जोखिम

वनों की कटाई अगर मौजूदा दर या इससे तेज रफ़्तार से जारी रही तो मरकरी में होने वाली वृद्धि भी इसी तरह से जारी रहने का अनुमान है। जबकि इन्ही जंगलों की बदौलत न सिर्फ तापमान नियंत्रित रहता है बल्कि यह हवा से ज़हरीले पदार्थों को साफ़ करने का काम भी करते हैं।

जंगलों की कटाई से वातावरण में बढ़ रहा है मरकरी के प्रदूषण का जोखिम

पिछले दशकों में, वैज्ञानिकों ने वैश्विक कार्बन डाइऑक्साइड उत्सर्जन को देखते हुए वनों की कटाई का अध्ययन किया है। इस संबंध में अभी तक पारे पर बराबर ध्यान नहीं दिया गया है। इसकी एक वजह यह है कि ग्लोबल मरकरी चक्र हाल ही में बेहतर ढंग से निर्धारित किया गया है।


पौधों की पत्तियाँ कार्बन डाइऑक्साइड की तरह ही माहौल से पारे को सोखने का काम करती हैं।


मैसाचुसेट्स इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी में किए गए एक अध्ययन के अनुसार, वैश्विक वनों की कटाई का खामियाज़ा हमारी धरती को भुगतना पड़ रहा है। अध्ययन बताता है कि हर साल वायुमंडल में होने वाले 10 प्रतिशत पारा (mercury) उत्सर्जन के लिए ऐसी मानवीय गतिविधियां जिम्मेदार है।

अध्ययन के प्रमुख लेखक डॉ. एरी फीनबर्ग का कहना है कि पारा प्रदूषण के मुख्य स्रोतों को पूरी तरह से नजरअंदाज किया जा रहा है और यह विशेष रूप से उष्णकटिबंधीय क्षेत्रों (tropical areas) में हो रहा है। टीम द्वारा जारी अनुमान के मुताबिक़, वैश्विक पुनर्वनीकरण (global reforestation) से हर साल उत्सर्जन में 5 प्रतिशत तक की कमी आ सकती है।

पौधों की पत्तियाँ कार्बन डाइऑक्साइड की तरह ही माहौल से पारे को सोखने का काम करती हैं। लेकिन कार्बन डाइऑक्साइड के विपरीत, पारे का पौधों के लिए कोई प्राथमिक जैविक काम नहीं है।

पारा पत्ती पर तब तक रहता है जब तक वह जंगल की ज़मीन पर नहीं गिर जाता। जमीन पर गिरने के बाद मिट्टी इसे सोख लेती है। वैज्ञानिकों को चिंता है कि पारा जल निकायों तक पहुंचकर फ़ूड चेन को ज़हरीला कर सकता है।

एरी फीनबर्ग ने कहा कि पारा को समुद्र की तुलना में मिट्टी में ज्यादा बेहतर तरीके से संग्रहित किया जा सकता है। इस संबंध में जंगल, पारे का आसवन (distillation) करके पर्यावरण के लिए बहुत अच्छा काम कर रहे हैं।

अध्ययन में शोधकर्ताओं के मॉडल से पता चला कि अमेज़ॅन वर्षावन पारा (mercury) को अवशोषित करने में बहुत महत्वपूर्ण भूमिका निभाते है। इसलिए, अमेज़ॅन में वनों की कटाई को कम करने से पारा प्रदूषण में काफी कमी आ सकती है।

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