मणिपुर चुनाव : आयरन लेडी’ कर रही CM के खिलाफ ‘साइकिल’ से मुकाबला

इंफाल : चार और आठ मार्च को दो चरणों में होने जा रहे मणिपुर चुनाव इस बार कुछ अलग मायने रखते हैं. उसकी सबसे बड़ी वजह यहां की ‘आयरन लेडी’ इरोम शर्मिला हैं. Irom

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विश्‍व में सबसे लंबे अनूठे अभियान के तहत मानवाधिकार कार्यकर्ता इरोम शर्मिला(44) ने लगातार 16 साल भूख हड़ताल रखने का रिकॉर्ड बनाया है.

मणिपुर में लागू आर्म्‍ड फोर्सेज स्‍पेशल पॉवर एक्‍ट (अफस्‍पा) के खिलाफ अभियान के तहत उन्‍होंने ऐसा किया.

पिछले साल अगस्‍त में उन्‍होंने अपने अनशन को तोड़ने के साथ घोषणा करते हुए कहा कि वह आगामी विधानसभा चुनाव लड़ेंगी और सत्‍ता में आकर अफस्‍पा को हटाने का काम करेंगी.

अफस्‍पा कानून अशांत इलाकों में लगाया जाता है और इसके तहत फौज की शक्तियों का दायरा बढ़ जाता है. इसके चलते कई बार फौज के मानवाधिकारों के उल्‍लंघन का मामला भी उठता है. कुछ ऐसे ही आरोपों के साथ इरोम ने अपना संघर्ष शुरू किया था.

अनशन खत्‍म करने के बाद अक्‍टूबर में इरोम ने अपनी पार्टी पीपुल्‍स रिसर्जेंस एंड जस्टिस अलायंस(पीआरजेए) का गठन किया. उन्‍होंने यह भी घोषणा करते हुए कहा कि वह पिछले एक दशक से सत्‍तारूढ़ राज्‍य के मुख्‍यमंत्री ओकराम इबोबी सिंह के खिलाफ थौबुल सीट से चुनाव लड़ेंगी.

इरोम का प्रचार दो वजहों से बेहद अनूठा है. एक तो उनकी पार्टी को सीटी(व्हिसिल) चुनाव निशान मिला है और दूसरी खास बात यह है कि उन्‍होंने मुख्‍यमंत्री के खिलाफ साइकिल से अपना प्रचार अभियान चलाया है.

प्रतिदिन 15-20 किमी साइकिल चलाकर उन्‍होंने अपना प्रचार अभियान चलाया है. वह इस क्रम में अपने साथ किसी दल-बल के साथ नहीं चलतीं.

बस अपनी हरक्‍यूलिस साइकिल पर रोज सुबह घर से निकलती हैं और उसी के सहारे दिन-भर प्रचार करती हैं. इस तरह उन्‍होंने अपने पूरे विधानसभा क्षेत्र का दौरा किया है.

फंड की समस्‍या से जूझ रही उनकी पार्टी के लोगों ने बाजार से सीटियां खरीदी हैं और वह सड़क पर गुजर रहे राहगीरों के समक्ष उनको बजाकर प्रचार करते रहे हैं.

अपने संघर्ष के बारे में आयरन लेडी के नाम से मशहूर हो चुकी इरोम शर्मिला का कहना है कि वह राज्‍य की मुख्‍यमंत्री बनकर अफस्‍पा को हटाना चाहती हैं. इसीलिए उन्‍होंने चुनाव में उतरने का फैसला किया है.

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