जिस तरह शहरों में ट्रैफ़िक सिग्नल के तालमेल से जाम कम होता है, उसी तरह देशों के बीच बेहतर तालमेल से उड़ानों में देरी घटाई जा सकती है। इसी सोच के साथ संयुक्त राष्ट्र की विमानन एजेंसी, अन्तरराष्ट्रीय नागरिक उड्डयन संगठन (ICAO) हवाई यातायात के बेहतर प्रबन्धन पर ज़ोर दे रही है। आईसीएओ अपने 193 सदस्य देशों के लिए साझा विमानन मानक तय करता है और तकनीकी सहायता देता है, ताकि सभी देश इस व्यवस्था से जुड़ सकें।
हवाई यात्रा में समय बचाने और उसे पर्यावरण के अनुकूल बनाने के लिए संयुक्त राष्ट्र की विमानन एजेंसी (ICAO) ने पहल की है। इससे देशों के बीच बेहतर तालमेल के के साथ न केवल समय और अरबों डॉलर का नुक़सान रोका जा सकेगा बल्कि ईंधन की खपत और कार्बन उत्सर्जन पर भी लगाम लगेगी।
‘हवाई यातायात प्रवाह प्रबन्धन’ के तहत विमानन कम्पनियाँ, हवाई अड्डे, यातायात नियंत्रक और मौसम विभाग जानकारी साझा करके मिलकर निर्णय लेते हैं। देशों में यह व्यवस्था लागू है, लेकिन आपसी तालमेल की कमी से इसका पूरा लाभ नहीं मिल पा रहा है। इसे दुनिया भर में तेज़ी से लागू करने के लिए ICAO की मॉन्ट्रियाल में आयोजित पाँच दिवसीय बैठक में सरकारों और विमानन उद्योग ने अपना समर्थन जताया। इससे यात्रियों को उड़ानों में देरी या रद्द होने की जानकारी पहले मिल सकेगी और बाधा आने पर उड़ानें जल्द सामान्य हो सकेंगी।
दुनिया भर में हवाई यातायात के बढ़ने की वजह से उड़ानों के पहुँचने में अक्सर देरी हो जाती है और यह यात्रियों के लिए एक बड़ी समस्या बन जाती है। हवाई यात्रा करने वाले लोग इस अनुभव से परिचित होंगे। उनकी उड़ान, हवाई अड्डे के पास पहुँचकर भी उतरने के बजाय आसमान में चक्कर लगाने लगती है।
आईसीएओ महासचिव ख़ुआन कार्लोस सालाज़ार ने कहा, “जब लोग हवाई अड्डे पर पूरा दिन इन्तज़ार करते हैं और उन्हें कोई जानकारी नहीं मिलती, तो समस्या और बढ़ जाती है।” आगे उन्होंने बताया कि एक उड़ान में देरी से अगली कई उड़ानें प्रभावित हो सकती हैं, और मौजूदा व्यवस्था में यातायात सामान्य होने में काफ़ी समय लगता है।
समय, धन और ईंधन की बचत
बेहतर तालमेल के लाभ सामने आने लगे हैं। आईसीएओ के सहयोग से वर्ष 2026 में अमरीकी क्षेत्र के देशों में हुए परीक्षणों में लगभग 4,400 घंटों और 3.89 करोड़ डॉलर से अधिक की बचत हुई।
साथ ही, लगभग 13,330 टन ईंधन बचा और 42 हज़ार टन से अधिक कार्बन डाइऑक्साइड का उत्सर्जन टाला गया। यह वर्ष 2050 तक अन्तरराष्ट्रीय विमानन में ‘नैट-ज़ीरो’ कार्बन उत्सर्जन के लक्ष्य की दिशा में भी एक अहम योगदान है।
योरोप में भी मौसम और हवाई यातायात की भीड़ का पहले से अनुमान लगाकर उड़ानों में देरी कम की गई। EUROCONTROL के अनुसार, इससे मई से अगस्त 2026 के बीच सभी उड़ानों को मिलाकर लगभग 31 लाख मिनट का समय बचाया गया।
इससे अनुमानित 44.8 करोड़ डॉलर की बचत हुई और सबसे अधिक व्यवधान वाले दिनों में हवाई यातायात की स्थिरता 14 प्रतिशत बढ़ी।
जानकारी साझा करने पर ज़ोर
ब्राज़ील और कोलम्बिया जैसे देश वर्षों से हवाई यातायात के बेहतर प्रबन्धन की व्यवस्था अपना रहे हैं, लेकिन इसका इस्तेमाल मुख्य रूप से अपने देशों तक सीमित है. जबकि अन्तरराष्ट्रीय उड़ानें कई देशों से होकर गुज़रती हैं।
ख़ुआन कार्लोस सालाज़ार के अनुसार, केवल टैक्नॉलॉजी ही काफ़ी नहीं है, देशों को समय पर जानकारी साझा करना भी ज़रूरी है। लेकिन कई बार इसके लिए सुविधाओं या इच्छाशक्ति की कमी होती है।
उन्होंने बताया कि योरोप से ऑस्ट्रेलिया या न्यूज़ीलैंड जाने वाली उड़ान चार-पाँच अलग-अलग क्षेत्रों से गुज़रती है. ऐसे में देशों के बीच तालमेल ज़रूरी है, जो अभी पर्याप्त नहीं है।
हवाई यातायात प्रबन्धन के नए अन्तरराष्ट्रीय नियम नवम्बर 2030 में लागू होने हैं। इससे पहले, वर्ष 2027 में क्षेत्रीय कार्यशालाएँ आयोजित की जाएँगी।
आईसीएओ के अनुमान के अनुसार, वर्ष 2050 तक दुनिया भर में हवाई यात्रियों की संख्या 12.4 अरब तक पहुँच सकती है। संगठन के महासचिव के अनुसार, लक्ष्य ऐसी हवाई परिवहन व्यवस्था बनाना है, जिसका लाभ दुनिया के हर व्यक्ति तक पहुँचे और लोगों को एक-दूसरे से जुड़ने के अधिक अवसर मिलें।