मेडिकल साइंटिस्ट्स ने टाइप 2 डायबिटीज़ के पता लगाने का एक बड़ा ही आसान तरीका खोजा है, जिसके तहत अब बिना खून लिए मरीज़ की आवाज़ सुनकर इस बीमारी का पता लगाया जा सकता है।
अब एआई-पावर्ड वॉइस एनालिसिस का इस्तेमाल करके, 20 सेकंड के स्पीच सैंपल से ऐसे लोगों की पहचान की जा सकती है जिन्हें टाइप 2 डायबिटीज के लिए पारंपरिक ब्लड टेस्ट करवाने की ज़रूरत है। यह खोज डायबिटीज की स्क्रीनिंग को मोबाइल फ़ोन और कॉल्स तक ला सकती है।
साइंटिस्ट्स के मुताबिक, डायबिटीज़ से इंसान की आवाज़ की फ़्रीक्वेंसी, इलास्टिसिटी और वोकल कॉर्ड्स में हल्के बदलाव आते हैं, जिन्हें इंसान अपने कानों से नहीं सुन सकता, लेकिन एआई सिस्टम इसे तुरंत पकड़ लेता है।
मरीज को बस अपने स्मार्टफ़ोन पर 6 से 10 सेकंड का एक वाक्य बोलना होता है, जिसके बाद एआई मॉडल आवाज़ के पैटर्न की पड़ताल करके बताता है कि इंसान को डायबिटीज़ है या नहीं, और यह टेस्ट लगभग 89 परसेंट सटीक नतीजे देता है।
रिसर्चर्स ने यूके और यूएस के 21,129 लोगों के 63,283 वॉइस सैंपल पर एक एआई स्पीच मॉडल को ट्रेन किया। इसके बाद, उन्होंने इस मॉडल को ‘ईसप की कहानियाँ’ (Aesop’s fables) पढ़ते हुए लोगों की 20-सेकंड की रिकॉर्डिंग पर टेस्ट किया। मिलान में ‘यूरोपियन एसोसिएशन फॉर द स्टडी ऑफ़ डायबिटीज’ की सालाना मीटिंग में पिछले पेश की गई रिसर्च के मुताबिक, एआई ने उन लोगों को ज़्यादा रिस्क स्कोर दिया जिन्हें टाइप 2 डायबिटीज़ थी; ऐसा 80 प्रतिशत मामलों में हुआ।
रिपोर्ट बताई हैं कि दुनिया भर में लाखों लोग इस बीमारी से अनजान रहते हैं। ऐसे में यह टेस्ट इस साइलेंट बीमारी को शुरुआती स्टेज में ही पकड़ने में बहुत मददगार होगा। यह टेक्नोलॉजी लाखों डायबिटीज़ मरीज़ों के लिए इसलिए भी बहुत काम की साबित होगी क्योंकि इससे न सिर्फ़ समय और पैसा बचेगा, बल्कि घर पर ही बिना किसी दर्द के इसका पता लगाना भी मुमकिन होगा।