केंद्रीय कर्मचारियों और पेंशन पाने वालों की निगाह आठवें वेतन आयोग के अंतिम फैसले पर

करीब 10 लाख पेंशनभोगियों का प्रतिनिधित्व करने वाले भारत पेंशनर्स समाज (BPS) और कर्मचारियों की शीर्ष संस्था नेशनल काउंसिल ऑफ जेसीएम ने 8वें वेतन आयोग को सौंपे ज्ञापन में एक समान नया फॉर्मूला पेश किया है।

केंद्रीय कर्मचारियों और पेंशन पाने वालों के लिए आठवां वेतन आयोग एक बड़ा तोहफा साबित हो सकता है। देशभर में बैठकों के साथ आठवें वेतन आयोग के माध्यम से विभिन्न कर्मचारी संगठनों से उनकी मांगों का ब्योरा तैयार किया जा रहा है। आयोग के समक्ष दशकों पुराने उस नियम को बदलने की मांग उठ रही है, जिसके आधार पर सरकारी कर्मचारियों की न्यूनतम सैलरी तय की जाती है।

मनी कंट्रोल की एक खबर के मुताबिक़, कर्मचारी यूनियनों ने परिवार की परिभाषा में बुजुर्ग माता-पिता को शामिल कर सैलरी तय करने की मांग की है। ऐसे में 3 के बजाय 5 यूनिट के नए फॉर्मूले से न्यूनतम बेसिक पे के 19,900/- से बढ़कर 69,000/- तक पहुंचने के आसार हैं।

खबर के अनुसार, अब तक वेतन आयोग न्यूनतम सैलरी का हिसाब लगाते समय एक परिवार में केवल 3 यूनिट (कर्मचारी, पति/पत्नी और 2 बच्चे) को ही जोड़ता था। लेकिन कर्मचारी यूनियनों और पेंशनभोगी संगठनों ने 8वें वेतन आयोग के समक्ष मांग रखी है कि इस परिवार यूनिट में बुजुर्ग आश्रित माता-पिता को भी शामिल किया जाए।

इस फॉर्मूले पर यदि मंजूरी मिलती है, तो कर्मचारियों की बेसिक पे और पेंशन में भारी-भरकम बढ़ोतरी हो सकती है। खबर में कहा गया है कि करीब 10 लाख पेंशनभोगियों का प्रतिनिधित्व करने वाले भारत पेंशनर्स समाज (BPS) और कर्मचारियों की शीर्ष संस्था नेशनल काउंसिल ऑफ जेसीएम (NCJCM-Staff Side) ने 8वें वेतन आयोग को सौंपे ज्ञापन में एक समान नया फॉर्मूला पेश किया है।

कर्मचारी (स्वयं): 1.0 यूनिट
पति या पत्नी: 1.0 यूनिट
दो बच्चे: 0.8 + 0.8 = 1.6 यूनिट
दो आश्रित माता-पिता: 0.8 + 0.8 = 1.6 यूनिट

खबर एक्सपर्ट्स के हवाले से परिवार की परिभाषा में माता-पिता को शामिल करने की यह मांग को आर्थिक नहीं, बल्कि व्यावहारिक रूप से बेहद जायज बताती है। इस हिसाब से कुल परिवार की यूनिट 5.2 (राउंड ऑफ में 5 यूनिट) बनती है। यूनियनों का तर्क है कि भारत में एक कर्मचारी न केवल अपने बच्चों का बल्कि अपने बुजुर्ग माता-पिता का भी मुख्य कमाऊ सहारा होता है। इसके अलावा ‘माता-पिता और वरिष्ठ नागरिक भरण-पोषण अधिनियम’ और ‘सोशल सिक्योरिटी कोड 2020’ भी कानूनी रूप से माता-पिता की जिम्मेदारी बच्चों पर डालता है।

खबर बताती है कि यदि 8वां वेतन आयोग, 5 यूनिट के इस नए फॉर्मूले को स्वीकार कर लेता है तो न्यूनतम सैलरी की गणना पूरी तरह बदल जाएगी। आयोग द्वारा 5 यूनिट का फॉर्मूला मान लेने की दशा में बेसिक सैलरी की शुरुआती सीमा काफी ऊपर चली जाएगी। इसका सीधा फायदा यह होगा कि नए कर्मचारियों की सैलरी के साथ-साथ पुराने पेंशनभोगियों की पेंशन में भी कई गुना का इजाफा होगा।

फिलहाल सबकी निगाहें 8वें वेतन आयोग के अंतिम फैसले पर टिकी हैं कि क्या वह इस 5.2 यूनिट वाले फॉर्मूले को स्वीकार करता है या पुराने 3-यूनिट ढर्रे पर ही कायम रहता है। यह फैसला आने वाले एक दशक तक देश के लाखों कर्मचारियों और पेंशनरों का भविष्य तय करेगा।

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