‘अगर शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान इस्तीफा नहीं देते तो आगे की बैठकों का कोई मतलब नहीं है।’ यह कहना है कॉकरोच जनता पार्टी का। सीजेपी और सरकार के बीच दो दौर की बातचीत हो चुकी है और तीसरे दौर की बातचीत से पहले सीजेपी की ओर से यह बयान आया है।
कॉकरोच जनता पार्टी के राष्ट्रीय प्रवक्ता आशुतोष रांका ने स्पष्ट कहा कि यदि केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान इस्तीफा नहीं देते हैं, तो सरकार के साथ आगे की बातचीत का कोई औचित्य नहीं रह जाएगा। उनका कहना है कि सरकार को इस मुद्दे पर अपना रुख स्पष्ट करना चाहिए।
कॉकरोच जनता पार्टी के बैनर तले दिल्ली के जंतर-मंतर पर छात्रों का आंदोलन लगातार जारी है और हर दिन जोर पकड़ रहा है। इन प्रदर्शनकरियों का कहना है कि आंदोलन तब तक जारी रहेगा जब तक उनकी प्रमुख मांगें पूरी नहीं होतीं। गौरतलब है कि आज सरकार और सीजेपी प्रतिनिधियों के बीच तीसरे दौर की बैठक प्रस्तावित है। इस बैठक को आंदोलन के लिहाज़ से बेहद अहम माना जा रहा है।
शिक्षामंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे और नीट पेपर लीक को लेकर चल रहे इस आंदोलन के बीच सरकार और सीजेपी के बीच दो दौर की बातों के बाद भी कोई हल नहीं निकल सका है। इस बीच आंदोलन दिल्ली सहित कई शहरों और कस्बों में पहुँचने की खबर है। विदेशों से भी इस तरह की वीडियो आ रही हैं, जिसमे आंदोलन को समर्थन दिया जा रहा है।
सरकार और कॉकरोच जनता पार्टी के बीच अभी तक कोई अंतिम सहमति नहीं बन सकी है। दोनों पक्षों के बीच कुछ मुद्दों पर सकारात्मक संकेत मिले हैं, लेकिन सबसे बड़ी मांग अब भी अधूरी है।
सीजेपी के राष्ट्रीय प्रवक्ता आशुतोष रांका ने बताया कि शुक्रवार को हुई बैठक में प्रदर्शनकारी छात्रों के लिए मुआवजे और उनके खिलाफ दर्ज मामलों को वापस लेने के मुद्दे पर सरकार की ओर से सकारात्मक प्रतिक्रिया मिली। उन्होंने यह जानकारी भी दी कि इन दोनों विषयों पर सिद्धांत रूप से सहमति बन गई है और संगठन को उम्मीद है कि सरकार जल्द ही इस संबंध में लिखित आश्वासन भी देगी।
रांका ने कहा, “अगर सरकार पहले ही तय कर चुकी है कि धर्मेंद्र प्रधान इस्तीफा नहीं देंगे, तो उसे साफ-साफ बता देना चाहिए। ऐसी स्थिति में आगे की बैठकों का कोई मतलब नहीं रह जाता।
उन्होंने यह भी कहा कि संगठन की सबसे महत्वपूर्ण मांग धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे को लेकर अब तक कोई ठोस निर्णय सामने नहीं आया है। उन्होंने इसके बाद हम अपने आंदोलन की अगली रणनीति तय करेंगे। उनके अनुसार, अगर सरकार अपने मौजूदा रुख पर कायम रहती है, तो हमें भी कड़ा फैसला लेने के लिए मजबूर होना पड़ेगा।
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक़, इससे पहले शुक्रवार को नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (एनटीए) के 47 अधिकारियों को बर्खास्त कर दिया गया है। इनमें से कुछ अधिकारियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई के भी संकेत दिए गए हैं।
मीडिया रिपोर्ट्स में पेपरलीक के खिलाफ चल रहे आंदोलन के बीच सरकार राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी में भी बड़ा बदलाव करने वाली है। खबर है कि सरकार राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी के आमूलचूल पुनर्गठन की योजना पर काम कर रही है। इसके तहत अगले एक महीने के भीतर एजेंसी की संरचना में बड़े बदलाव किए जाएंगे।