सोनम वांगचुक का उपवास समाप्त, कठोर बिल लाएंगे मोदी, विपक्ष के सवाल बरक़रार

पर्यावरणविद और सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक ने 26 दिन के बाद बीती रात अपना अनशन समाप्त कर दिया। पेपर लीक के खिलाफ सोनम वांगचुक कॉकरोज जनता पार्टी के साथ पहले जंतर-मंतर पर 20 दिनों तक अनशन पर बैठे रहे। दिल्ली पुलिस 21वें दिन उन्हें इलाज के लिए सफदरजंग हॉस्पिटल ले गई। प्रधानमंत्री ने पेपर लीक पर कठोर बिल लाने की बात कही है।

हाई कोर्ट के आदेश पर वांगचुक को गुरुग्राम के मेदांता हॉस्पिटल में भर्ती कराया गया था, जहां बीती रात केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा और डॉ. जितेंद्र सिंह की मौजूदगी में उन्होंने अनशन समाप्त किया।

सोनम वांगचुक ने अपने अनशन समाप्त करने की जानकारी सोशल मीडिया पोस्ट के माध्यम से दी। पहले उन्होंने एक्स पर एक पोस्ट लिखकर इसके बारे में बताया और फिर सुबह यू-ट्यूब पर 11 मिनट 30 सेकेंड के एक वीडियो के माध्यम से उन्होंने तफ्सील से इस संबंध में जानकारी दी।

अस्पताल की तस्वीर साझा करते हुए सोशल मीडिया पर सोनम वांगचुक ने लिखा, ‘अभी कुछ देर पहले केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा, डॉ. जितेंद्र सिंह और लेह-लद्दाख की एपेक्स बॉडी के वरिष्ठ नेताओं की मौजूदगी में मैंने 26 दिनों बाद अपना उपवास तोड़ा।’

आगे उन्होंने बताया कि इससे पहले विभिन्न राजनीतिक दलों के 65 सांसद उनसे मिले या पत्र लिखकर उपवास ख़त्म करने की अपील की थी। उनके मुताबिक़, यह फ़ैसला अलग-अलग शर्तों पर लंबी बातचीत और देश में संभावित हिंसा की आशंका को देखते हुए लिया गया है।

उन्होंने यह भी बताया कि, शर्तों के बारे में मैं जल्द ही एक अलग वीडियो में विस्तार से जानकारी देंगे। साथ ही उन्होंने सभी से अपील की है कि किसी भी तरह की हिंसा को कहीं भी न होने देने के लिए पूरी तरह सतर्क रहें।

सोनम वांगचुक के अनशन समाप्त किए जाने पर कॉकरोच जनता पार्टी के संस्थापक अभिजीत दीपके ने एक्स पर लिखा, ‘हमें राहत और ख़ुशी है कि सोनम सर ने 26 दिनों बाद अपनी भूख हड़ताल ख़त्म कर दी। आपके असाधारण साहस और त्याग के लिए धन्यवाद, सर।’

आगे उन्होंने लिखा कि अपनी जान दांव पर लगाकर उन्होंने पूरे देश की अंतरात्मा को झकझोर दिया। साथ ही धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफ़े तक जंतर-मंतर पर कॉकरोच जनता पार्टी का शांतिपूर्ण आंदोलन जारी रहने की जानकारी भी अभिजीत दीपक ने दी।

सोनिया गांधी ने छात्र आंदोलन और पेपर लीक विवाद पर मोदी सरकार को निशाने पर लिया है। साथ ही उन्होंने शिक्षा व्यवस्था सहित पुलिस कार्रवाई और जवाबदेही को लेकर कई सवाल उठाए हैं।

हालाँकि अभी तक आंदोलन में शामिल छात्रों के साथ पुलिस के व्यवहार पर किसी भी तरह की प्रतिक्रिया या जवाबदेही सामने नहीं आई है। जबकि अटल बिहारी वाजपेयी की सरकार में शिक्षा मंत्री रहे मुरली मनोहर जोशी ने बीती शाम सोशल मीडिया मंच एक्स पर लिखा, ”छात्रों की चिंताएं और सरोकार वास्तविक हैं। इन्हें सहानुभूति और दूरगामी समाधान की दृष्टि से हल किया जाना चाहिए। मुझे पूरी आशा है कि इसे केवल क़ानूनी और व्यवस्था की समस्या के रूप में नहीं देखा जाएगा, जिससे बलपूर्वक निपटा जाए। मुझे यह देखकर अत्यन्त पीड़ा हुई है कि महिलाओं पर निर्मम बल प्रयोग किया गया।’

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी एक वीडियो जारी कर पेपर लीक पर कठोर बिल लाने की बात कही है। हालाँकि अपने संदेश में न तो छात्रों के आंदोलन पर और न ही धर्मेंद्र प्रधान के बारे में कोई बात कही है।

राहुल गांधी ने पलटवार करते हुए प्रधान इस्तीफे की बात दोहराई है। लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने परधानमंत्री मोदी को जवाब देते हुए लिखा, ‘मोदी जी, हमारे छात्र तो धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा मांग रहे हैं।’

राहुल ने आगे लिखा, ‘आधी रात को जारी अपने इस वीडियो से छात्रों की समझदारी का अपमान मत कीजिए।’ राहुल गांधी ने छात्रों की तीनों मांगे दोहराते हुए लिखा है, “प्रधान को बर्खास्त करो, जिन्होंने छात्रों को पीटा उन्हें सजा दो और छात्रों से माफी मांगो।’

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