हर वर्ष 25 जून को अंतर्राष्ट्रीय नाविक दिवस मनाया जाता है। यह दिवस उन समुद्री कर्मियों के योगदान के महत्व को बताता है, जो महासागरों और समुद्री मार्गों के जरिए वैश्विक व्यापार को निर्बाध बनाए रखते हैं।
विभिन्न अंतर्राष्ट्रीय समुद्री संगठन सहित संयुक्त राष्ट्र के अनुसार, विश्व व्यापार का लगभग 80% से अधिक हिस्सा मात्रा के आधार पर समुद्री मार्गों से संचालित होता है। इसमें कच्चे तेल से लेकर खाद्यान्न, दवाइयों, इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों और उपभोक्ता वस्तुओं तक, अधिकांश सामान समुद्री जहाजों के जरिए विभिन्न देशों तक पहुंचता है।
ये समुद्री कर्मी लंबे समय तक समुद्र में रहकर चुनौतीपूर्ण हालत में काम करते हैं। इस बीच इन कर्मियों को खराब मौसम, समुद्री तूफानों, समुद्री डकैती जैसी कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है। इसके बावजूद वे वैश्विक व्यापार को सुचारु बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
अंतर्राष्ट्रीय नाविक दिवस की शुरुआत वर्ष 2010 में हुई थी। उस वर्ष फिलीपींस की राजधानी मनीला में आयोजित अंतर्राष्ट्रीय समुद्री संगठन (IMO) के सदस्य देशों के सम्मेलन में इसे मनाने का निर्णय लिया गया। इस अवसर पर यह तय किया गया कि हर वर्ष 25 जून को दुनिया भर के नाविकों के योगदान को सम्मान देने के लिए एक विशेष दिवस मनाया जाएगा।
तब ही से आज का दिन वैश्विक स्तर पर समुद्री समुदाय के लिए एक महत्वपूर्ण अवसर बन गया है। सम्मेलन में समुद्री प्रशिक्षण, प्रमाणन और नाविकों की कार्य परिस्थितियों से जुड़े महत्वपूर्ण संशोधनों को अपनाया गया था, जिन्हें “मनीला संशोधन” के नाम से जाना जाता है।
हर वर्ष अंतर्राष्ट्रीय नाविक दिवस एक विशेष थीम के साथ मनाया जाता है। अंतर्राष्ट्रीय नाविक दिवस 2026 की थीम “विश्व व्यापार का संचालन करना। जोखिम उठाना” (Carrying world trade. Carrying the risks) है। अंतर्राष्ट्रीय समुद्री संगठन द्वारा 25 जून को मनाए जाने वाले इस दिवस की 2026 की थीम समुद्र में जीवन की कठिनाइयों, दबाव और जोखिमों को प्रकाश में लाती है। इसका उद्देश्य वैश्विक व्यापार को सुचारू रूप से चलाने में नाविकों की आवश्यक और अक्सर अनदेखी की जाने वाली भूमिका को रेखांकित करना है।