मोटापा और डायबिटीज के आंकड़ों ने भारतीयों की सेहत के मामले में बढ़ाई चिंता

देश में मोटापा और हाई ब्लड शुगर के केस पहले के मुकाबले बढ़े हैं। हैरान आंकड़े बताते हैं कि यह समस्या अब गांवों में भी तेजी से फैल रही है। भारत की सेहत से जुड़ी NFHS-6 की नई रिपोर्ट चिंता बढ़ाने वाली है। वहीँ रिपोर्ट के मुताबिक, बच्चों के स्वास्थ्य से जुड़े कुछ आंकड़ों में स्थिति संतोषजनक है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक़, स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय की ओर से कराए गए NFHS-6 सर्वे में देश के 715 जिलों के लगभग 6.79 लाख परिवारों को शामिल किया गया। इस सर्वे का मकसद लोगों के स्वास्थ्य, पोषण और परिवार कल्याण से जुड़ी स्थिति को समझना था। रिपोर्ट में कई ऐसे आंकड़े सामने आए हैं, जो भारत में बदलती जीवनशैली की कहानी बयान करते हैं।

मोटापा और डायबिटीज़ जैसी समस्या सिर्फ बड़े शहरों तक सीमित नहीं रह गई है। बदलती जीवनशैली के साथ जंक फूड और शारीरिक गतिविधियों की कमी के चलते अब गांवों और शहरों दोनों में लोगों का वजन तेजी से बढ़ रहा है।

रिपोर्ट बताती है कि पांच साल के भीतर महिलाओं में मोटापे के मामलों में 6.7 प्रतिशत अंकों की बढ़ोतरी दर्ज की गई। वर्ष 2019 से 21 के बीच 24 प्रतिशत महिलाएं अधिक वजन या मोटापे की श्रेणी में थीं। वहीं 2023-24 तक यह आंकड़ा बढ़कर 30.7 प्रतिशत हो गया।

यह समस्या शहरों में ज्यादा गंभीर नजर आई। शहरी क्षेत्रों में 42.8 प्रतिशत महिलाएं अधिक वजन या मोटापे से प्रभावित पाई गईं, जबकि ग्रामीण क्षेत्रों में ये आंकड़ा 25.5 प्रतिशत रहा।महिलाओं की तरह पुरुषों में भी मोटापे के मामले में वृद्धि देखी गई है। जहाँ वर्ष 2019-21 में 22.9 प्रतिशत पुरुष अधिक वजन या मोटापे से ग्रस्त थे, लेकिन 2023-24 में ये संख्या बढ़कर 27.3 प्रतिशत हो गई। ग्रामीण इलाकों में 23 प्रतिशत पुरुषों का वजन सामान्य से अधिक पाया गया, जबकि शहरों में ये आंकड़ा 36.3 प्रतिशत तक पहुंच गया।

इस रिपोर्ट में केवल मोटापा ही नहीं, बल्कि हाई ब्लड शुगर के बढ़ते मामलों को लेकर भी चिंता जताई गई है। पहले के मुक़ाबले इस समय 15 साल और उससे अधिक उम्र के लोगों में ब्लड शुगर बढ़ने की समस्या अधिक पाई गई है।

पुरुषों में हाई या बहुत अधिक ब्लड शुगर स्तर वाले लोगों का प्रतिशत 15.6 से बढ़कर 20.9 हो गया। शहरी क्षेत्रों में यह आंकड़ा 23.9 प्रतिशत और ग्रामीण क्षेत्रों में 19.7 प्रतिशत दर्ज किया गया।

महिलाओं में हाई ब्लड शुगर के मामले पुरुषों से कम जरूर हैं, लेकिन वृद्धि की रफ्तार काफी तेज है। 2019-21 में 13.5 प्रतिशत महिलाओं ने हाई ब्लड शुगर या उससे संबंधित दवा लेने की जानकारी दी थी। अब यह आंकड़ा बढ़कर 17.8 प्रतिशत पहुंच गया है। शहरों में 21.9 प्रतिशत और गांवों में 16.2 प्रतिशत महिलाएं इस समस्या से प्रभावित पाई गईं।

इस रिपोर्ट का सबसे सकारात्मक पहलू यह है कि पांच साल से कम उम्र के बच्चों में ठिगनेपन (स्टंटिंग) समस्या पहले की तुलना में कम हुई है। इस समस्या में बच्चों में होने वाली शारीरिक और मानसिक विकास के कारण बच्चे की लंबाई उसकी उम्र के अनुपात में कम रह जाती है। इसमें अब सुधर पाया गया है।

2019-21 में जहां 35.5 प्रतिशत बच्चे स्टंटिंग से प्रभावित थे, वहीं 2023-24 में ये आंकड़ा घटकर 29.3 प्रतिशत रह गया। यह बताता है कि बच्चों के पोषण और स्वास्थ्य सुधार के लिए किए जा रहे प्रयासों का असर सामने आने लगा है।

रिपोर्ट से यह भी पता चला है कि सी-सेक्शन यानी ऑपरेशन के जरिए होने वाले प्रसव की संख्या लगातार बढ़ रही है। खासतौर पर निजी अस्पतालों में ये बढ़ोतरी ज्यादा देखने को मिली। प्राइवेट स्वास्थ्य संस्थानों में 2019-21 के दौरान 47.4 प्रतिशत प्रसव सी-सेक्शन से हुए थे, जो 2023-24 में बढ़कर 54.1 प्रतिशत हो गए। वहीं सरकारी अस्पतालों में यह आंकड़ा 14.3 प्रतिशत से बढ़कर 16.9 प्रतिशत तक पहुंच गया।

NFHS-6 के आंकड़े साफ बताते हैं कि भारत तेजी से बदलती जीवनशैली का असर झेल रहा है। एक ओर बच्चों के पोषण में सुधार हो रहा है, लेकिन दूसरी ओर वयस्कों में मोटापा और हाई ब्लड शुगर जैसी समस्याएं तेजी से बढ़ रही हैं। स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि संतुलित भोजन, नियमित व्यायाम और सक्रिय दिनचर्या अपनाकर इन समस्याओं के खतरे को काफी हद तक कम किया जा सकता है।

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