नर्वस सिस्टम को सक्रिय करने वाली बॉक्स ब्रीदिंग एक बेहद सरल और प्रभावी तकनीक है। आज की बिज़ी दुनिया में, काम का प्रेशर, लगातार चिंता और ज़्यादा सोचने की आदत आपके दिमाग को आराम करने का मौका नहीं देती। ऐसे में, एक आसान ब्रीदिंग एक्सरसाइज़ बहुत बड़ा फ़र्क ला सकती है।
बॉक्स ब्रीदिंग या ‘फोर-स्क्वायर ब्रीदिंग’ जिसका उपयोग नेवी सील्स (Navy SEALs) से लेकर एथलीट तक करते हैं और इसकी मदद से तनाव को तुरंत कम करने के साथ एकाग्रता बढ़ाते हैं। यह तकनीक आपके पैरासिम्पैथेटिक करती है, जो शरीर के तनाव को कम करके तुरंत शांति का एहसास दिलाती है।
इन दिनों जब इंसान सुकून की खातिर कितने ही तरीकों को खोजने और आज़माने में जुटा है, ऐसे में बॉक्स ब्रीदिंग टेक्नीक दिमाग को शांत करने के लिए तेज़ी से पॉपुलर हो रही है। यह मन को शांत करने, शरीर को आराम देने और एकाग्रता बढ़ाने में मदद कर सकती है।
क्या है बॉक्स ब्रीदिंग
बॉक्स ब्रीदिंग का मुख्य मकसद साँस पर फ़ोकस करना है, जो नैचुरली नसों को शांत करता है। इसका एक आसान तरीका है जो तेज़ रफ़्तार वाले विचारों को धीमा करता है और शरीर को आराम देता है। इस टेक्नीक का इस्तेमाल एथलीट, स्पीकर, प्रोफ़ेशनल और यहाँ तक कि मिलिट्री के लोग भी स्ट्रेस वाले पलों में शांत और फ़ोकस्ड रहने के लिए करते हैं।
सबसे बड़ा फ़ायदा
इस एक्सरसाइज़ के लिए किसी खास इक्विपमेंट, शांत कमरे या मेडिटेशन के अनुभव की ज़रूरत नहीं होती है। सिर्फ़ एक मिनट फ़ोकस्ड ब्रीदिंग आपको ज़्यादा प्रेज़ेंट और इमोशनली बैलेंस्ड महसूस करने में मदद कर सकती है।
बॉक्स ब्रीदिंग कैसे करें स्टेप एक
आराम से बैठें और चार सेकंड के लिए अपनी नाक से साँस अंदर लें। अपने कंधों को ऊपर उठाने के बजाय उन्हें रिलैक्स करें।
स्टेप दो
चार सेकंड के लिए अपनी सांस रोकें और इस दौरान अपने शरीर को टेंशन को नज़रअंदाज़ करते हुए शांत रहें।
स्टेप तीन
चार सेकंड के लिए अपने मुंह से सांस छोड़ें। साथ ही यह भी सोचिए कि हर सांस के साथ आपके शरीर से स्ट्रेस निकल रहा है।
स्टेप चार
सांस छोड़ने के बाद, चार सेकंड के लिए अपनी सांस रोकें और अपने शरीर को रिलैक्स होने दें। इस साइकिल को पांच से दस मिनट तक दोहराया जा सकता है। बस कुछ राउंड के बाद, आपकी हार्ट रेट धीमी हो जाएगी और आपके विचार शांत महसूस होंगे।
लाभ
बॉक्स ब्रीदिंग तब खास तौर पर मददगार होती है जब आप स्ट्रेस में हों, एंग्जायटी में हों, नर्वस हों, भावनात्मक रूप से भारीपन या थकावट महसूस कर रहे हों, या किसी भी काम या विषय पर फोकस करने में दिक्कत महसूस कर रहे हों।
एक्सपर्ट के मुताबिक़ इसकी रेगुलर प्रैक्टिस से इमोशनल कंट्रोल, कॉन्सेंट्रेशन और नींद की क्वालिटी बेहतर होती है। इसके साथ ही जानकार यह सलाह भी देते हैं कि इसे करने से पहले अपने चिकित्सक से एक बार परामर्श ज़रूर लें।