खाड़ी में चल रहे युद्ध से वहां के समुद्री जीवों और पक्षियों को खतरा

यूएस और इज़राइल के ईरान पर हमलों की वजह से खाड़ी में चल रहा तनाव न सिर्फ़ इंसानों की जान बल्कि पानी वाले जीवों और पक्षियों को भी खतरा है। मिडिल ईस्ट में युद्ध शुरू होने से पहले ही, क्लाइमेट चेंज और समुद्री ट्रैफिक की वजह से इकोसिस्टम पर दबाव था। जहाजों पर हमलों, तेल रिसाव और रसायनों के रिसाव से इस क्षेत्र की जैव विविधता को भारी नुकसान हो रहा है।


ब्रिटिश चैरिटी कॉन्फ्लिक्ट एंड एनवायरनमेंट ऑब्ज़र्वेटरी की पिछले दिनों जारी एक रिपोर्ट के मुताबिक, लड़ाई शुरू होने के बाद से इस इलाके में पर्यावरण को नुकसान पहुंचाने वाली 300 से ज़्यादा घटनाएं दर्ज की गई हैं, जिसमें तेल टैंकरों पर हमले भी शामिल हैं।


यूएस और इज़राइल द्वारा ईरान पर हमलों (ऑपरेशन रोरिंग लायन/एपिक फ्यूरी) के कारण फारस की खाड़ी (Persian Gulf) और ओमान की खाड़ी में गहराता तनाव न केवल मानव जीवन के लिए, बल्कि क्षेत्रीय समुद्री पारिस्थितिकी तंत्र (Marine Ecosystem) और वन्यजीवों के लिए एक गंभीर पर्यावरणीय आपातकाल बन गया है। मार्च 2026 में बढ़ी इस जंग के दौरान अब तक 300 से अधिक ऐसी घटनाएं रिकॉर्ड की गई हैं, जिनसे पर्यावरण को बड़ा खतरा है।

फ़ारस की खाड़ी, जो औसतन 50 मीटर गहरी है, होर्मुज़ स्ट्रेट के ज़रिए हिंद महासागर से जुड़ी हुई है, और यह जगह इसके इकोसिस्टम को कमज़ोर बनाती है। फ़ारस की खाड़ी में पानी का धीरे-धीरे रिन्यूअल हर 2 से 5 साल में तेल या दूसरी तरह के प्रदूषण के फैलने को कम करता है।

इस इलाके में दुनिया की दूसरी सबसे बड़ी डुगोंग आबादी है, जिन्हें ‘सी काउज़’ भी कहा जाता है, और जो पहले से ही खत्म होने के खतरे में हैं।

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