अमरीकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का कहना है कि ईरान से जुड़ा युद्ध जल्द खत्म हो सकता है।ओवल ऑफिस में पत्रकारों से बातचीत के दौरान ट्रंप ने कहा कि यह युद्ध ज्यादा लंबा नहीं चलेगा। उनके मुताबिक, जब यह युद्ध समाप्त होगा तो दुनिया पहले से ज्यादा सुरक्षित हो जाएगी।

पत्रकारों से बात करते हुए उन्होंने यह भी बताया कि इस संघर्ष के कारण उन्होंने चीन की अपनी तय यात्रा को फिलहाल टाल दिया है, क्योंकि इस समय उन्हें वॉशिंगटन में रहना जरूरी लग रहा है।
ईरान की तारीफ करते हुए डोनाल्ड ट्रंप ने यह भी कहा किमैं बहुत समझदार लोगों से निपट रहा हूं। उन्होंने ईरानियों को बहुत ऊंचे स्तर की सोच वाला और बहुत ऊंचे आईक्यू वाला भी बताया।
इस दौरान अमरीकी राष्ट्रपति ने परमाणु खतरों को लेकर भी चिंता जताई और कहा कि अगर दुश्मन देश परमाणु हमला करें तो दुनिया शेयर बाज़ार दोनों पर ही गंभीर असर पड़ेगा। इस वार्ता से संकेत मिल रहे हैं कि ट्रंप इस युद्ध को जल्द ही खत्म करना चाहेंगे। आगे उन्होंने कहा कि सच कहें तो उन्हें लगा था कि शेयर बाजार इससे कहीं ज्यादा नीचे जा सकता है, लेकिन ऐसा नहीं हुआ। उनके अनुसार, अगर कुछ नुकसान भी होता है तो यह बहुत छोटी कीमत है।
एक अन्य जब उनसे पूछा गया कि आगे सेना की क्या योजना हो सकती है और क्या जमीन पर सेना भेजने की जरूरत पड़ सकती है, तो जवाब में ट्रंप ने इस पर टिप्पणी करने से इनकार कर दिया।
ट्रंप ने यह भी बताया कि उन्होंने चीन से अपनी यात्रा लगभग एक महीने के लिए टालने का अनुरोध किया है। उन्होंने कहा कि वे चीन के साथ बातचीत कर रहे हैं और वहां जाना चाहते हैं, लेकिन मौजूदा हालात को देखते हुए उन्हें अमरीका में ही रहना जरूरी लग रहा है।
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक़, ट्रंप ने ये बातें उस समय कहीं जब उन्होंने ओवल ऑफिस में घरेलू धोखाधड़ी से जुड़ा एक ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए। इसके बाद वह पत्रकारों के साथ होने वाली लंबी बातचीत में ईरान और चल रहे सैन्य अभियान पर ही बात करते रहे।
उनका कहना है कि यह कार्रवाई केवल अमरीका के लिए नहीं, बल्कि पूरी दुनिया के हित में की गई है।उनके अनुसार अगर कार्रवाई न की जाती तो इसके कहीं ज़्यादा गंभीर परिणाम होते। साथ ही उन्होंने यह कहा कि अगर मैंने वह न किया होता जो मैंने किया तो हम पर हमला हो चुका होता।
राष्ट्रपति ने इस संघर्ष के बाद ईरान की सैन्य क्षमता काफी कमजोर होने का भी दावा किया है। उन्होंने कहा कि अब ईरान के पास प्रभावी नौसेना नहीं है, वायुसेना नहीं है, हवाई हमलों से बचाव के हथियार नहीं हैं और साथ ही उन्होंने ईरानी नेतृत्व के कमजोर होने की भी बात कही।










