यूनिवर्सिटी ऑफ़ ब्रिस्टल की एक नई स्टडी से पता चला है कि बच्चे अपने पहले जन्मदिन से पहले ही धोखा देने और झूठ बोलने की कला सीख लेते हैं। एक्सरपर्ट बच्चे के इस बर्ताव को उनके डेवलपमेंट का एक नॉर्मल हिस्सा मानते हैं।

एक्सपर्ट्स के मुताबिक, 10 महीने की उम्र तक एक चौथाई बच्चे धोखा देना समझने लगते हैं, जबकि 17 महीने की उम्र तक यह दर आधी हो जाती है। एक्सपर्ट्स का यह भी कहना है कि 3 साल की उम्र तक बच्चे ज़्यादा स्किल्ड, क्रिएटिव और अक्सर झूठ बोलने वाले बन जाते हैं।
स्टडी में 750 बच्चों के पेरेंट्स का सर्वे किया गया, जिनमें सबसे छोटा 8 महीने का बच्चा था। इस शोध के दौरान पेरेंट्स ने बताया कि बच्चे कई तरह से झूठ बोलते हैं, जैसे बड़ों की बात न सुनने का नाटक करना, खिलौने छिपाना, गलत बात कहना, बढ़ा-चढ़ाकर बताना, या किसी काम से बचने के लिए न समझने का नाटक करना।
एक्सपर्ट्स के मुताबिक, दो साल की उम्र के बाद, बच्चे प्रैक्टिकली धोखा देने लगते हैं, जैसे, साफ-सफाई के बारे में पेरेंट्स की बात न सुनने का नाटक करना या चॉकलेट खाने के बावजूद इंकार करना।
स्टडी की मुख्य लेखिका एलेना होइका, जो यूनिवर्सिटी ऑफ़ ब्रिस्टल में एजुकेशन की प्रोफ़ेसर हैं, ने कहा, “यह जानना बहुत दिलचस्प था कि बच्चों में झूठ को समझने और उसका इस्तेमाल करने की समझ कितनी कम उम्र से विकसित होने लगती है, और उनके शुरुआती सालों में यह इतनी मज़बूत हो जाती है कि वे काफ़ी माहिर और चालाक ‘छोटे झूठे’ बन जाते हैं।”
प्रोफेसर एलेना होयका ने कहा कि पेरेंट्स को चिंता करने की ज़रूरत नहीं है क्योंकि यह बिहेवियर बच्चों के डेवलपमेंट का एक नॉर्मल हिस्सा है। उनके मुताबिक, पेरेंट्स स्टडी के रिज़ल्ट से जान सकते हैं कि किस उम्र में किस तरह की ट्रिक्स सामने आ सकती हैं, ताकि वे बच्चों को बेहतर ढंग से समझ सकें और उनसे अच्छे से बात कर सकें।












