नेशनल एयर एंड स्पेस म्यूजियम के सेंटर फॉर अर्थ एंड प्लैनेटरी स्टडीज के वैज्ञानिकों ने खुलासा किया है कि चांद लगातार सिकुड़ रहा है और अपना आकार बदल रहा है। पेपर के अनुसार, चंद्रमा पर दिख रही छोटी लकीरें, जो घोड़े के पैरों के निशान जैसी हैं, चंद्रमा के अंधेरे मैदानों पर एक प्रकार की ढालें हैं जो असल में हाल ही में बनी हैं।

वैज्ञानिकों ने चांद की सतह पर 1,114 नई लकीरें खोजी हैं। ये पहले मौजूद नहीं थीं। इस नई स्टडी से यह भी पता चला है कि चांद की सतह पर 1,000 से ज़्यादा नई दरारें मिली हैं, जिससे भविष्य के लूनर मिशन की सुरक्षा के लिए खतरा बढ़ गया है। यह स्टडी द प्लैनेटरी साइंस जर्नल में छपी थी, जिसमें कहा गया था कि इस खोज से भविष्य के लूनर एक्सप्लोरेशन मिशन को गंभीर भूकंप का खतरा हो सकता है।
स्टडी के मुख्य लेखक, कोल नेपियर ने कहा कि भविष्य के मिशन चांद की टेक्टोनिक और भूकंपीय गतिविधि के बारे में ज़रूरी डेटा इकट्ठा करने के लिए बहुत ज़रूरी हैं। उन्होंने आगे कहा कि यह डेटा सीधे मिशन की सुरक्षा और वैज्ञानिक सफलता को फायदा पहुंचाएगा, और हम लूनर साइंस और एक्सप्लोरेशन के लिए बहुत ही रोमांचक समय में हैं।
गौरतलब है कि वैज्ञानिकों को 2010 से ही चांद के सिकुड़ने की जानकारी है, लेकिन नई दरारों, जिन्हें स्मॉल मेर रिज (SMRs) कहा जाता है, की खोज चांद पर रिसर्च में एक बड़ी तरक्की है।
एक्सपर्ट्स का मानना है कि इस खोज से हमें चांद के इलाके, उसकी अंदरूनी बनावट और थर्मल हिस्ट्री को बेहतर ढंग से समझने में मदद मिलेगी। यह बताता है कि चंद्रमा की सतह अभी भी सिकुड़ रही है। इसकी वजह से यहां भूकंप आ रहे हैं और यह भविष्य के महत्वाकांक्षी चंद्र मिशनों के लिए बड़ा खतरा बन सकते हैं।
पहली बार ग्लोबल लेवल पर छोटे चंद्र टीलों का मानचित्र स्मिथसोनियन प्लेनेटरी साइंस टीम द्वारा तैयार किया गया है। टीम ने पाया है कि इसकी टेक्टॉनिक गतिविधि कहीं ज्यादा ताजा और बड़े क्षेत्र में फैली है।
