हर दिन अपनों के ही हाथों मौत की शिकार होती हैं सैकड़ों महिलाएँ- रिपोर्ट

इस आधुनिक और मशीनी दुनिया में आज भी महिलाओं के प्रति बढ़ती हिंसा एक बेहद गम्भीर मुद्दा बना हुआ है। संयुक्त राष्ट्र की एक नई रिपोर्ट बताती है कि दुनिया भर में, लड़कियों और महिलाओं की हत्या जैसे अपराधों के स्तर में कोई ख़ास बदलाव नहीं आया है। रिपोर्ट के मुताबिक़, हर साल हज़ारों लड़कियों और महिलाओं को, उनके अपने अंतरंग साथियों और परिवार के सदस्यों के हाथों ही, मौत के मुँह में धकेल दिया जाता है।

हर दिन अपनों के ही हाथों मौत की शिकार होती हैं सैकड़ों महिलाएँ- रिपोर्ट

संयुक्त राष्ट्र के ड्रग्स और अपराध निरोधक कार्यालय (UNODC) के साथ महिला सशक्तिकरण के लिए संस्था (UN Women) द्वारा एक साझा रिपार्ट प्रकाशित की गई है। रिपोर्ट के अनुसार, वर्ष 2024 में करीब 50 हज़ार लड़कियों और महिलाओं को उन्हीं के अंतरंग साथी या परिवार के सदस्यों द्वारा मार डाला गया।

रिपोर्ट के अनुसार, हर दिन औसतन 137 लड़कियों और महिलाओं की हत्या कर दी जाती है। हर 10 मिनट में एक लड़की या महिला की हत्या होना यह दर्शाता है कि वैश्विक प्रतिबद्धताओं के बावजूद, आज भी कुछ विशेष परिवर्तन नहीं आया है।


यूएन वीमैन की नीति विभाग की निदेशक सारा हैंड्रिक्स का कहना है कि महिलाओं की हत्या, किसी एकाकी घटना का परिणाम नहीं होती। यह अक्सर हिंसा की निरन्तर श्रृंखला का हिस्सा होती है, जो नियंत्रण करने वाले व्यवहार, धमकियों और उत्पीड़न से भी शुरू हो सकती है।


2025 में प्रकाशित महिलाओं की हत्या (Violence against women and girls) शीर्षक वाली यह रिपोर्ट महिलाओं के प्रति हिंसा उन्मूलन के अन्तरराष्ट्रीय दिवस के अवसर पर प्रकाशित की गई है। रिपोर्ट स्पष्ट करती है कि 2024 में 83 हज़ार लड़कियों और महिलाओं की इरादतन हत्या कर दी गई, जिनमें से 50 हज़ार यानि 60 प्रतिशत हत्याएँ अंतरंग साथी या परिवार के किसी सदस्य के हाथों की गई।

रिपोर्ट के अनुमानों के अनुसार, इस तरह की हत्याएँ सबसे अधिक अफ़्रीका में की गई है जहां हर एक लाख में से 3 लड़की या महिला की संख्या है जबकि योरोप में यह मामले सबसे कम दर्ज हुए हैं। जबकि, इसके विपरीत अपने किसी अंतरंग साथी या पारिवारिक सदस्य के हाथों हत्या के शिकार होने वाले पुरुषों का आँकड़ा 11 प्रतिशत है।

यूएन वीमैन की नीति विभाग की निदेशक सारा हैंड्रिक्स का कहना है कि महिलाओं की हत्या, किसी एकाकी घटना का परिणाम नहीं होती। यह अक्सर हिंसा की निरन्तर श्रृंखला का हिस्सा होती है, जो नियंत्रण करने वाले व्यवहार, धमकियों और उत्पीड़न से भी शुरू हो सकती है। आगे उन्होंने बताया कि इस वर्ष संयुक्त राष्ट्र का 16 दिनों तक चला अभियान यह बताता है कि डिजिटल हिंसा, सिर्फ़ ऑनलाइन ही सीमित नहीं है।

यह ऑनलाइन मंचों से हटकर वास्तविकता में भी गम्भीर रूप ले सकती है, और ये हिंसा, अत्यंत भयावह मामलों में हत्या का रूप भी ले सकती है। निदेशक सारा हैंड्रिक्स ने कहा कि हर लड़की और महिला को अपने जीवन के हर पहलू में, सुरक्षित रहने का अधिकार है।

आगे उन्होंने यह भी कहा कि इन हत्याओं से बचने के लिए ज़रूरत है ऐसे क़ानूनों को कड़ाई से लागू किए जाने की, जो महिलाओं और लड़कियों के जीवन में हिंसा के ऑनलाइन और ऑफ़लाइन रूपों को समझें और अपराधियों की कठोर जवाबदेही तय करें।

घर के बाहर भी महिलाओं की हत्याएँ होती हैं, पर इनके आँकड़े बेहद सीमित हैं। इन कमियों को दूर करने के लिए यूएन वीमैन और UNODC, वर्ष 2022 के सांख्यिकीय ढाँचे के ज़रिए बेहतर पहचान और आलेखन पर काम कर रहे हैं। ऐसे में सटीक डेटा का बड़ा महत्व है, ताकि समस्या की वास्तविक गम्भीरता समझने का साथ प्रभावी क़दम उठाए जा सकें और पीड़ितों को न्याय मिल सके।

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