दुनिया भर लगभग एक अरब 30 करोड़ आबादी पशुपालन के ज़रिए अपनी आजीविका चला रही है। यह क्षेत्र दुनिया भर में कृषि से मिलने वाले सकल घरेलू उत्पाद में लगभग 40 प्रतिशत का योगदान करता है। ऐसे में बेहद ज़रूरी है कि पशुपालन क्षेत्र की टिकाऊ और ज़िम्मेदार तरीक़े से देखभाल के साथ उसके विकास के महत्व को समझा जाए।

रोम स्थित खाद्य एवं कृषि संगठन (FAO) मुख्यालय में इस अहम मुद्दे पर विचार करने के लिए टिकाऊ पशुपालन परिवर्तन पर दूसरा वैश्विक सम्मेलन आयोजित किया गया है। इस सम्मेलन का उद्देश्य- एकजुट होकर ऐसे समाधान साझा करने का है, जो पशुपालन क्षेत्र को स्थाई और भविष्य के अनुरूप बना सकें।
यह सम्मेलन पहली अक्टूबर तक जारी रहेगा और यहाँ एक हज़ार से अधिक प्रतिभागी हिस्सा ले रहे हैं। इनमें सरकारी प्रतिनिधि, किसान, निजी कम्पनियाँ, शोधकर्ता, नागरिक समाज और अन्तरराष्ट्रीय एजेंसियाँ शामिल हैं।
संयुक्त राष्ट्र के खाद्य एवं कृषि संगठन (FAO) के महानिदेशक क्यू डोंग्यू का कहना है -“अनुभव यह दिखाता है कि जब अच्छे तरीके़ अपनाए जाते हैं तो पशुपालन प्रणाली वास्तव में टिकाऊ बन सकती है।”
रिपोर्ट्स के मुताबिक़, टिकाऊ पशुपालन परिवर्तन पर दूसरा वैश्विक सम्मेलन, इस बार केवल संवाद तक सीमित नहीं है, बल्कि ठोस कार्रवाई की दिशा में आगे बढ़ने के लिए प्रतिबद्ध है।
भोजन के साथ आय का जरिया
दुनिया की लगभग 1.3 अरब आबादी की आजीविका, सीधे तौर पर पशुपालन से जुड़ी हुई है। ख़ासतौर पर निम्न और मध्य आय वाले देशों में पशुपालन, केवल भोजन ही नहीं, बल्कि आय, बचत और मुश्किल समय में सुरक्षा का भी आधार है।
पोषण से के अलावा भी पशुपालन की बहुत अहमियत है। यह आय और रोज़गार का प्रमुख साधन है, जो युवाओं और महिलाओं के लिए नए अवसर उत्पन्न करता है।
पशुपालन आर्थिक झटकों के समय बचत और बीमा जैसा सुरक्षा कवच भी प्रदान करता है।
यह क्षेत्र खाद्य सुरक्षा और पोषण में भी अहम योगदान देता है, क्योंकि पशु-आधारित खाद्य पदार्थ, वैश्विक प्रोटीन खपत का लगभग एक-तिहाई हिस्सा उपलब्ध कराते हैं।
विज्ञान भी लगातार यह पुष्टि करता रहा है कि दूध, अंडे और माँस जैसे उत्पाद, सन्तुलित आहार का अनिवार्य हिस्सा हैं, विशेष रूप से बच्चों और निर्बल हालात वाली आबादी के लिए।
चुनौतियाँ
लेकिन चुनौतियाँ भी मौजूद हैं, जो पर्यावरण पर दबाव, सार्वजनिक स्वास्थ्य जोखिम और पशु कल्याण से जुड़ी चिन्ताओं के रूप में लगातार बढ़ रही हैं।
फिर भी, FAO प्रमुख का मानना है कि दुनिया के कई हिस्सों में, पहले से ही समाधान मौजूद हैं: जैसे गोबर से स्वच्छ ऊर्जा बनाना, उप-उत्पादों को नए संसाधनों में बदलना और पशुओं को स्वास्थ्यकर वातावरण में पालना।















