विदेश मंत्रालय के अनुसार जनवरी 2026 तक दुनिया के अलग-अलग देशों में 3 करोड़ 72 लाख 80 हजार 845 प्रवासी भारतीय रह रहे थे। पिछले बारह वर्षों में विदेश से अपने देश में आने वाला पैसा दोगुना हो गया है। इस बीच एक ही साल में भारतीय कामगारों ने अपने घरों में करीब 144.8 बिलियन डॉलर यानी 14 लाख करोड़ रुपये भेजे हैं।
विदेश में रहने वाले भारतीय अभी भी अपने परिवारों को भरपूर रकम भेज रहे हैं। युद्ध और आर्थिक स्थिरता के बावजूद इस राशि पर कोई असर नहीं पड़ा है बल्कि यह रही बढ़ी है।
ईटीवी की एक रिपोर्ट बताती है कि, विदेश में रह रहे भारतीय अपने परिवारों को रिकॉर्ड पैसे भेजने के अलावा अमीर देशों में काम भी कर रहे हैं, साथ ही संकट में घिरे खाड़ी देशों में भी अपनी सेवाएं दे रहे हैं।
खबर के अनुसार, पिछले 12 साल में विदेश से अपने देश में आने वाला पैसा दोगुना हो गया है। इस बीच एक ही साल में भारतीय कामगारों ने अपने घरों में करीब 14 लाख करोड़ (144.8 बिलियन डॉलर) रुपये भेजे हैं।
रिपोर्ट से यह भी पता चला है कि, साल 2013-14 में विदेश से जितना पैसा अपने देश में पहुंचता था, अब वह दोगुने से भी ज्यादा हो गया है। पिछले 4 साल में इसमें काफी तेजी देखने को मिली है। साल 2021-22 में करीब 6 लाख करोड़ रुपये विदेश में काम करने वाले भारतीयों ने अपने परिवारों को भेजे थे। वर्ष 2025-26 में यह 14 लाख करोड़ हो गया।
बताते चलें कि संसद के मानसून सत्र में तेलंगाना के भोंगीर से सांसद चमाला किरण कुमार रेड्डी ने इस संबंध में सवाल पूछे थे। उनका प्रश्न था कि पश्चिम एशिया और दुनिया के अन्य देशों में संघर्ष चल रहा है। ऐसे में क्या विदेश में रह रहे भारतीयों के विदेशी धन भेजने के ट्रेंड पर कोई खराब असर पड़ा है? केंद्रीय वित्त राज्य मंत्री पंकज चौधरी ने रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया के बैलेंस ऑफ पेमेंट्स डेटा के जरिए इसका लिखित जवाब दिया।
केंद्रीय वित्त राज्य मंत्री ने बताया कि विदेश में रह रहे भारतीयों की ओर से परिवारों को भेजे जाने वाले पैसे में लगातार इजाफा हो रहा है। खाड़ी देशों में छिड़ी जंग का इस पर असर नहीं पड़ा है। वहीं आईडीएफसी फर्स्ट बैंक की रिपोर्ट के अनुसार पहले खाड़ी देशों में काम करने वाले भारतीय ही वहां से अपने परिवारों को रुपये भेजते थे। अब अमरीका, ब्रिटेन जैसे देशों में भारतीय डॉक्टर, इंजीनियर और आईटी प्रोफेशनल्स की संख्या काफी बढ़ी है, ये लोग भी अब रुपये भेजने लगे हैं। इसलिए विदेशी धन में काफी उछाल आया है।