दस अक्टूबर को वर्ल्ड मेंटल हेल्थ डे मनाया जाता है। विश्व स्वास्थ्य संगठन की 2022 की रिपोर्ट बताती है कि दुनिया में हर 8 में से 1 व्यक्ति किसी न किसी मानसिक समस्या से जूझ रहा है। इस दिन लोगों को मानसिक स्वास्थ्य समस्याओं और उनसे निपटने के लिए भी जागरूक किया जाता है।

मानसिक स्वास्थ्य पर सबसे गंभीर असर डालने वाले कारकों में विशेषज्ञ तेज़ी से बदलते सामाजिक ढाँचे और जीवनशैली का नाम लेते हैं। अकसर लोग रोजमर्रा की जिंदगी में अपने मेंटल हेल्थ पर ध्यान नहीं देते हैं, इसके नतीजे में उन्हें कई दिक्कतों का सामना करना पड़ता है।इस साल वर्ल्ड मेंटल हेल्थ डे की थीम है- आपदा या आपातकाल की स्थिति में मानसिक स्वास्थ्य सेवाओं तक पहुंच (Access to Services: Mental Health in Catastrophes and Emergencies)
मानसिक संतुलन को गहराई से प्रभावित करने वाले कारकों पर ध्यान दें तो पाते हैं कि पारिवारिक ढांचे में बदलाव के अलावा काम का बढ़ता दबाव, माहौल में प्रतिस्पर्धा, सामाजिक मेलजोल में कमी, नशे की बढ़ती प्रवृत्ति और डिजिटल प्लेटफ़ॉर्म पर अत्यधिक निर्भरता ने लोगों को इस समस्या के समीप ला दिया है। इसके नतीजे में चिंता, अवसाद, अनिद्रा और सामाजिक अलगाव जैसे हालात जन्म लेते हैं।
मानसिक स्वास्थ्य सर्वे हर दस साल के बाद होता है। मीडिया रिपोर्ट्स से पता चलता है कि देश में हुए 2016 में हुए मेंटल हेल्थ सर्वे के अनुसार हर दसवां व्यक्ति मानसिक रोग से ग्रसित था। अब नया मेंटल हेल्थ सर्वे शुरू हुआ है, जिसकी रिपोर्ट 2026 में आएगी।
ईटीवी की एक रिपोर्ट बताती हैं कि दिल्ली एम्स में हर साल ओपीडी में एक लाख से ज्यादा मानसिक रोगियों का इलाज किया जाता है। यहाँ हर महीने ओपीडी में आने वाले मरीजों की संख्या करीब एक लाख रहती है और 300 से 400 मरीज डेली ओपीडी में आते हैं। इनमें 100 नए और 300 पुराने मरीज होते हैं। यहाँ हर साल भर में 350 से 400 मरीज भर्ती होते हैं।
हालाँकि वर्तमान में लोगों की मानसिक स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता बढ़ रही है मगर बदलता सामाजिक ढाँचे और उसके बहुत ही तेज़ रफ़्तार से बदलती जीवनशैली इस जागरूकता के अनुपात में पिछड़ जाती है। ऐसे में ज़रूरी है कि इस समस्या को समझें और बिना झिझक विशेषज्ञ से मदद लें।














