आज का दिन विश्व हृदय दिवस (29 सितंबर) के लिए जाना जाता है। इसकी शुरुआत वर्ष 2000 में वर्ल्ड हार्ट फॉउंडेशन द्वारा की गई थी। इसे मनाने का उद्देश्य हृदय रोगों और उनके बचाव के प्रति लोगों को जागरूक करना है।
इस वर्ष 2026 के लिए विश्व हृदय दिवस की थीम है- ‘दिल को कार्रवाई के लिए इस्तेमाल करें’ (Use Heart for Action)। हृदय रोग (सीवीडी) के प्रति लापरवाही में रोगी कई लक्षणों को नज़रअंदाज़ कर देता है और बाद में इस गलती का एहसास होता है। ‘कीप द बीट’ चैलेंज रोजाना 20 मिनट शारीरिक गतिविधि के लिए लोगों को प्रोत्साहित करता है। इसमें चलना, साइकिल चलाना, खेलना, दौड़ना या नृत्य जैसी गतिविधियां शामिल हो सकती हैं। हालांकि व्यायाम की मात्रा और प्रकार व्यक्ति की उम्र, स्वास्थ्य स्थिति और चिकित्सकीय सलाह के अनुरूप होना चाहिए।
उम्र, स्वास्थ्य या जीवनशैली की परवाह किए बिना यह मर्ज़ किसी को भी प्रभावित कर सकता है। युवाओं में जन्मजात हृदय रोग से लेकर महिलाओं और ब्लड प्रेशर की समस्या जैसे अनदेखे लक्षणों को अनदेखा किया जाना इसके संकेतों से मुंह मोड़ना है। यही लापरवाही एक महंगे खर्च के साथ जानलेवा भी हो जाती है।
दिल की इन बीमारियों में कोरोनरी, सेरेब्रोवास्कुलर, रूमेटिक हार्ट की समस्या और हृदय एवं रक्त वाहिकाओं से जुड़ी अन्य समस्याएं शामिल हैं। विश्व स्वास्थ्य संगठन का कहना है कि हृदय और रक्त वाहिकाओं से जुड़ी बीमारियां दुनिया में मौत का प्रमुख कारण हैं। वर्ष 2022 में हृदय संबंधी रोगों से अनुमानित 19.8 मिलियन लोगों की मौत हुई, जो वैश्विक मौतों का करीब 32 फीसद है। इनमें 85 फीसद मौतें हार्ट अटैक और स्ट्रोक के कारण हुईं।
डब्ल्यूएचओ के मुताबिक 2022 में हृदय संबंधी बीमारियों से हुई मौतों में 85 फीसद मौतें हार्ट अटैक और स्ट्रोक के कारण हुईं। इन बीमारियों का असर केवल बुजुर्ग आबादी तक सीमित नहीं है। डब्ल्यूएचओ के अनुसार 2021 में गैर-संचारी रोगों से 70 वर्ष से कम उम्र में हुई 18 मिलियन समय से पहले मौतों में कम से कम 38 फीसद मौतें हृदय संबंधी रोगों से जुड़ी थीं।
भारत में भी दिल से जुड़ी बीमारियां गैर-संचारी रोगों के बढ़ते बोझ का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं। आईसीएमआर से जुड़े अध्ययनों में अनहेल्दी डाइट, है ब्लड प्रेशर, बढ़ी हुई ब्लड शुगर, बढ़ा हुआ कोलेस्ट्रॉल और अधिक वजन जैसे कारणों से इस बीमारी को ज़्यादा ही विस्तार मिला है। आईसीएमआर के अनुसार इन जोखिम कारकों पर काबू करके बीमारी से बहुत हद तक बचाव मुमकिन है।
रिपोर्ट्स बताती हैं कि दिल की बीमारी कोअक्सर निर्णय लेने वालों द्वारा नजरअंदाज कर दिया जाता है। वैश्विक स्तर पर मृत्यु का प्रमुख कारण होने के बावजूद, 20 से भी कम देशों में हृदय रोग से निपटने के लिए एक अलग राष्ट्रीय योजना है।