जलवायु परिवर्तन को गम्भीरता से लेने के लिए द हेग स्थित अन्तरराष्ट्रीय न्यायालय (ICJ) ने देशों की ज़िम्मेदारियों पर अपनी परामर्श राय जारी की है। जलवायु परिवर्तन की अहमियत को देखते हुए न्यायालय की इस राय के वैश्विक स्तर पर काफ़ी महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

यूएन महासचिव एंतोनियो गुटेरेश ने एक वीडियो सन्देश में इस अवसर पर लिये गए निर्णय का स्वागत किया है। बुधवार को न्यायालय के अध्यक्ष न्यायाधीश इवासावा यूजी ने यह राय सार्वजनिक रूप से पढ़कर सुनाई। संयुक्त राष्ट्र की की इस मुख्य न्यायिक संस्था ने निर्णय दिया है कि देशों पर यह ज़िम्मेदारी है कि वे ग्रीनहाउस गैस (GHG) उत्सर्जन से, पर्यावरण की रक्षा करें। साथ ही, इस दायित्व को निभाने के लिए सतर्कता और आपसी सहयोग के साथ काम करें।
एंतोनियो गुटेरेश ने इसे पृथ्वी ग्रह के लिए, जलवायु न्याय और निर्णायक कार्रवाई करने की युवजन की शक्ति के लिए एक विजय बताया है। साथ ही इसमें पेरिस समझौते के तहत यह बाध्यता भी शामिल है कि देशों को वैश्विक तापमान वृद्धि को पूर्व-औद्योगिक स्तरों की तुलना में, 1.5 डिग्री सैल्सियस तक सीमित रखना होगा।
अन्तरराष्ट्रीय न्यायालय ने स्पष्ट किया कि यदि देश, इन दायित्वों का उल्लंघन करते हैं, तो उन पर क़ानूनी ज़िम्मेदारी तय होती है। ऐसे में उन्हें न केवल अपना ग़लत आचरण रोकना होगा बल्कि फिर से ऐसा नहीं करने का आश्वासन देना होगा और हालात के अनुसार पूर्ण मुआवज़ा भी देना पड़ सकता है।
इस निर्णय को समर्थन के लिए न्यायालय ने सदस्य देशों की पर्यावरणीय और मानवाधिकार सन्धियों के प्रति प्रतिबद्धताओं का हवाला दिया। इन देशों ने ओज़ोन परत, जैव विविधता, क्योटो प्रोटोकॉल, पेरिस समझौता जैसी कई अन्तरराष्ट्रीय पर्यावरणीय सन्धियों पर हस्ताक्षर किए हैं, जो उन्हें वैश्विक नागरिकों और भविष्य की पीढ़ियों के लिए पर्यावरण की रक्षा करने के लिए बाध्य बनाती हैं।
कई मानवाधिकारों के संरक्षण के लिए स्वच्छ, स्वस्थ और टिकाऊ पर्यावरण आवश्यक है। क्योंकि, सदस्य देश संयुक्त राष्ट्र के सार्वभौमिक मानवाधिकार घोषणापत्र समेत कई मानवाधिकार सन्धियों के पक्षकार हैं।










