क्रिकेट की दुनिया में ज़ीरो पर आउट होना आखिर डक क्यों कहलाता है

जब कोई बल्लेबाज़ पारी शुरू करते ही बिना कोई रन बनाए शून्य पर आउट हो जाता है, तो उसे क्रिकेट की भाषा में डक कहा जाता है। हम सभी अगर यह खेल टीवी स्क्रीन देख रहे होते हैं तो उस समय एक डक की तस्वीर भी दिखाई जाती है। लेकिन क्या कभी किसी ने सोचा है कि क्रिकेट में ज़ीरो पर आउट होने को डक क्यों कहते हैं? या क्रिकेट और डक के बीच क्या संबंध है?

क्रिकेट की दुनिया में ज़ीरो पर आउट होना आखिर डक क्यों कहलाता है

कम ही लोग इसके पीछे की कहानी जानते हैं। दरअसल, यह शब्द बत्तख के अंडे के कारण पड़ा है। इस अंडे का आकार शून्य जैसा होता है। ऐसे में जब कोई खिलाड़ी ज़ीरो पर आउट होता है, तो उसे अंडे पर आउट होना भी कहा जाता है।

क्रिकेट इतिहास में 1866 में एक ऐतिहासिक घटना उस समय घटी जब प्रिंस ऑफ वेल्स एक मैच में शून्य पर आउट हो गए। अगले दिन अखबार ने लिखा कि वह “बत्तख के अंडे पर सवार होकर” पवेलियन लौटे। उस समय यह मुहावरा इतना लोकप्रिय हुआ कि उसके बाद हर अखबार इस शब्द का इस्तेमाल करने लगा और तब से क्रिकेट में ‘डक’ शब्द चलन में आ गया।

अब इसके आगे का क्रम बना ‘गोल्डन’ और ‘डायमंड’ डक। तो जो लोग इस नाम और उसके इतिहास से अपिरिचत हैं वह भी इसे जान लें। इतना तो सभी जानते हैं कि क्रिकेट में अगर कोई बल्लेबाज बिना रन बनाए ज़ीरो पर आउट हो जाता है तो उसे डक कहते हैं, लेकिन अगर कोई बल्लेबाज अपनी पहली ही गेंद पर शून्य पर आउट हो जाता है, तो उसे गोल्डन डक कहते हैं।

इससे भी ऊपर एक और शब्दावली को जगह मिली और यह है डायमंड डक। इस शब्द का इस्तेमाल तब किया जाता है जब कोई बल्लेबाज बिना कोई गेंद खेले शून्य पर आउट हो जाता है।

ऐसा ज़्यादातर नॉन-स्ट्राइकर एंड पर रन आउट होने की स्थिति में होता है, या कभी-कभी स्ट्राइकर एंड पर वाइड गेंद पर स्टंप आउट हो जाता है, जिसे भी डायमंड डक माना जाता है।

गौरतलब है कि वनडे क्रिकेट में सबसे ज़्यादा बार शून्य पर आउट होने का अनोखा रिकॉर्ड पूर्व श्रीलंकाई क्रिकेटर सनथ जयसूर्या के नाम है, जो 34 बार शून्य पर आउट हुए थे। इस सूची में दूसरे स्थान पर पाकिस्तान के पूर्व कप्तान शाहिद अफरीदी हैं, जो वनडे क्रिकेट में 30 बार बिना कोई रन बनाए शून्य पर आउट हुए हैं।

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