क्या आपने कभी सोचा है कि एस्केलेटर की सीढ़ियों पर लाइनें क्यों होती हैं? शायद कम हो ल्प्गों का इस तरफ ध्यान गया होगा। जबकि सच्चाई यह है कि इस मॉडर्न युग में लगभग सभी ने कभी न कभी एस्केलेटर से किसी ईमारत में चढ़ने या उतरने में में मदद ली होगी।
इसका आविष्कार 1892 में जेसी रेनो द्वारा किया गया था। इस मोटर-चालित निरंतर लूप प्रणाली की सहायता से यात्रियों को कदम बढ़ाए बगैर ही एक मंजिल से दूसरी मंजिल तक आने जाने की सुविधा मिल जाती है। यह मेट्रो, मॉल और हवाई अड्डों जैसे भीड़भाड़ वाले स्थानों में परिवहन के लिए उपयोग की जाती है।
दुनिया के किसी भी देश में एस्केलेटर पर अजीब लाइनें ज़रूर होती हैं। ये लाइनें सिर्फ डिज़ाइन नहीं हैं, बल्कि इसके कई महत्वपूर्ण कार्य हैं। इन लाइनों की वजह से सीढ़ियाँ बिल्कुल अलग दिखती हैं, और इन लाइनों के होने के कुछ खास कारण हैं।
इसका मुख्य कारण तो यह है कि पतझड़ और सर्दियों के मौसम में एस्केलेटर की सीढ़ियाँ बहुत गीली हो जाती हैं। इस गीलेपन के चलते ये सीढ़ियाँ चिकनी होने पर फिसलने का खतरा रहता है।
ऐसे में यात्रियों को फिसलने और चोट लगने से बचाने के लिए एस्केलेटर की सीढ़ियों पर ये लाइनें होती हैं। लाइनें होने से यात्रियों के जूते सीढ़ियों पर नहीं फिसलते और सीढ़ियों पर उनकी पकड़ भी मज़बूत बनी रहती है।
एस्केलेटर की सीढ़ियों पर लाइन होने का एक और कारण यह है कि यात्रा के दौरान, रैपर जैसा हल्का कचरा अक्सर सीढ़ियों पर गिर जाता है, इसलिए अगर सीढ़ियां चिकनी हैं, तो यह कचरा एस्केलेटर के अंदर तक पहुंचकर उसे नुकसान पहुंचा सकता है।