क्या है इंजीनियरिंग और मेडिकल के एंट्रेंस में कामयाबी का प्रतिशत

देश भर में करोड़ों बच्चे हर साल विभिन्न क्षेत्रों में अपना करियर बनाने का प्रयास करते हैं। मेडिकल और इंजीनियरिंग आज भी ऐसा क्षेत्र है जो अधिकतर बच्चों का सपना होता है। इसके लिए बच्चे छोटी क्लास से तैयारी शुरू करते हैं, पत्राचार कोर्सेस की मदद लेते हैं और अपने या दूसरे शहरों में जाकर इम्तिहान की तैयारियों के लिए कोचिंग करते हैं।

क्या है इंजीनियरिंग और मेडिकल के एंट्रेंस में कामयाबी का प्रतिशत

ईटीवी भारत ने आईआईटी मेडिकल प्रवेश परीक्षा से जुड़ा एक आंकलन प्रस्तुत किया है। इसके लिए बीते 5 सालों में सफलता का प्रतिशत का आकलन किया गया। आंकलन के जो नतीजे सामने आए वह इस तरह हैं-

इंजीनियरिंग प्रवेश परीक्षा में शामिल होने वाले लाखों कैंडिडेट्स में से महज 1.20 से 1.65 फीसदी के बीच की कैंडिडेट को आईआईटी की सीट मिलती है। औसत देखा जाए तो यह लगभग 1.75 फीसदी कैंडिडेट ही आईआईटी की सीट हासिल कर पाते हैं।

जेईई मेन 2025 यानी जॉइंट एंट्रेंस एग्जाम मेन की बात करें तो इस परीक्षा में 1539848 कैंडिडेट ने रजिस्ट्रेशन करवाया था, जिसमें से 250236 को एडवांस्ड के लिए क्वालीफाई माना गया।

इनमें से जेईई एडवांस्ड के लिए 1.90 लाख के करीब कैंडिडेट्स ने रजिस्ट्रेशन करवाया था, जिनमें से 1.85 लाख के आसपास परीक्षा देने पहुंचे हैं। इन विद्यार्थियों में से करीब 45 से 50 हजार के बीच कैंडिडेट्स को काउंसलिंग के लिए पत्र घोषित किया जाएगा। इन्हें देश की 23 आईआईटी की 18 हजार के आसपास सीटों पर प्रवेश मिलेगा। इस बार 1.20 फीसदी सफल रहेंगे।

मेडिकल में दाखिला लेने वालों की बात करें तो इसमें प्रवेश लेने के लिए नीट यूजी परीक्षा देनी होती है। यहाँ भी रजिस्ट्रेशन करवाने वाले लाखों कैंडिडेट्स में से 5 से 6 फीसदी बच्चों को ही सीट मिल पाती है।

यदि सरकारी और सस्ती एमबीबीएस सीट की बात की जाए तो यह आंकड़ा 2.50 से 3.25 के बीच पहुंच जाता है। आंकलन बताता है कि नीट यूजी के जरिए बीते 5 सालों में एमबीबीएस सीट पाने वाले कैंडिडेट्स का प्रतिशत 5.25 के आसपास रहा है। वहीँ सरकारी सीट पाने वालों का प्रतिशत 2.75 के आसपास रहा है।

इससे पता चलता है कि इस परीक्षा में शामिल लाखों कैंडिडेट्स में से महज कुछ हजार को ही सरकारी सीट मिलती है। इस रिपोर्ट के अनुसार एमबीबीएस 2024 में नीट यूजी की परीक्षा देने वालों में सबसे कम 4.9 फीसदी कैंडिडेट को ही एमबीबीएस की सीट मिली थी। इस बार रिकॉर्ड रजिस्ट्रेशन रहा था, जो 24.06 लाख था।

वहीँ जानकारी से यह भी पता चला कि सबसे ज्यादा प्रतिशत साल 2021 में रहा, जहां पर 98145 एमबीबीएस सीट के लिए 16.14 लाख कैंडिडेट ने इम्तिहान देना चाहा था और उस वर्ष 6.08 फीसदी कैंडिडेट एमबीबीएस की सीट हासिल कर सके थे।

रिपोर्ट से पता चलता है कि जेईई एडवांस्ड के लिए साल 2024 में 1.20 कैंडिडेट को ही सीट मिली थी। इस बार यह संख्या और कम हो सकती है, क्योंकि रजिस्ट्रेशन में बढ़ोतरी हुई है।

साल 2022 में जेईई मेन में 10.26 लाख कैंडिडेट्स ने रजिस्ट्रेशन करवाया था, जिसमें से करीब 2.50 लाख एडवांस्ड के लिए क्वालीफाई घोषित हुए थे। इनमें से 16635 को आईआईटी की सीट मिली थी। इस साल जेईई मेन से आईआईटी की सीट तक पहुंचने वाले कैंडिडेट का प्रतिशत 1.62 था।

साल 2025 के लिए नीट यूजी का रजिस्ट्रेशन कराने वाले बच्चों की संख्या 23 लाख के करीब है। इन कैंडिडेट्स को वर्तमान में 1.20 लाख एमबीबीएस सीटों पर एडमिशन मिलना है। इनमें से करीब 62 हजार के आसपास सरकारी एमबीबीएस सीट हैं। इनमें से भी कुछ फीसदी सीट मैनेजमेंट या एनआरआई कोटा की है। जिस पर अधिक फीस देनी होती है।

ऐसे में करीब 55 हजार के आसपास एमबीबीएस वाली सीट सस्ती है, जबकि शेष 58 हजार के आसपास सीट निजी मेडिकल कॉलेज और यूनिवर्सिटी की है। यहां पर 50 लाख से लेकर सवा करोड़ रुपए तक एमबीबीएस की फीस है।

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