हर दिन भोजन की बर्बादी में जल भूमि ऊर्जा और मेहनत की बर्बादी भी शामिल है

एक बड़ी जनसँख्या के लिए भोजन की कमी के बावजूद इसका बड़ा हिस्सा आज भी बर्बाद हो जाता है। हर दिन बड़ी मात्रा में अच्छा और खोने योग्य भोजन फेंक दिया जाता है।

भोजन की इस बर्बादी के साथ इसके उत्पादन में इस्तेमाल किया गया जल, भूमि, ऊर्जा व मेहनत भी बर्बाद हो जाती है। यह स्थिति वैश्विक तापमान में वृद्धि की वजह बन रही है और इसलिए यह ज़रूरी है कि भोजन को व्यर्थ न जाने दिया जाए।

यूएन पर्यावरण कार्यक्रम और खाद्य एवं कृषि संगठन (FAO) ने बीते दिन मंगलवार 29 सितम्बर, को ‘भोजन हानि व बर्बादी के प्रति जागरूकता के अन्तरराष्ट्रीय दिवस’ पर इसी विषय पर ध्यान दिलाया है। इस वर्ष, वनों का संरक्षण और सतत कृषि-खाद्य प्रणालियों को सुनिश्चित करने पर बल दिया गया है।

खाने से बचे भोजन को जब फेंका जाता है तो यह कचरा भराव स्थल पर सड़ी हुई खाद्य सामग्री के ढेर को बढ़ाता जाता है। इन स्थलों पर यह अन्य प्रकार की गंदगी के साथ मिलकर मीथेन गैस का उत्पादन करता है जिसकी वैश्विक ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन में 8-10 प्रतिशत की हिस्सेदारी है।

यूएन समाचार के एक अनुमान के अनुसार, कृषि पैदावार के बाद लगभग 13 फ़ीसदी भोजन की हानि होती है और यह ख़राब होने वाली ऐसी खाद्य सामग्री है जो कभी भंडारण केन्द्रों या दुकानों तक नहीं पहुँच पाती है।

संयुक्त राष्ट्र पर्यावरण कार्यक्रम (UNEP) का विश्लेषण दर्शाता है कि उपभोक्ताओं के लिए उपलब्ध लगभग 19 प्रतिशत भोजन, यानि हर साल क़रीब एक अरब टन खाने योग्य खाद्य सामग्री, या तो फ़ुटकर दुकानों, खाद्य केन्द्रों या फिर घर-परिवारों द्वारा फेंक जाती है।

इसकी एक वजह ज़रूरत से अधिक खाना बनाया जाना, उसका बर्बाद जाना या फिर बिना किसी अनुमान के खाद्य सामग्री को जुटाना है।

यूएन की भूमिका
यूएन पर्यावरण एजेंसी, एक पहल को समर्थन दे रही है जिसमें 13 होटल, एआई की मदद से फेंके हुए भोजन को माप रहे हैं, ताकि ख़रीदारी और तैयारी में उसी तरह से बदलाव लाए जा सकें। इससे चार महीनों में, सुबह के नाश्ते के समय बर्बाद होने वाली खाद्य सामग्री में 62 प्रतिशत की कमी आई है।

यूएन पर्यावरण एजेंसी, आवश्यकता से अधिक मात्रा में उपलब्ध सुरक्षित भोजन को ज़रूरतमन्द लोगों तक पहुँचाने के प्रयासों में जुटी है, जैसेकि वंचित समुदायों के इलाक़ों में दैनिक देखभाल केन्द्रों में भोजन की व्यवस्था।

भोजन को कचरा जमाव स्थलों से दूर रखने के लिए नवाचारी उपायों का सहारा लिया जा रहा है। उदहारण के तौर पर ब्राज़ील में एक परियोजना के तहत स्थानीय समुदायों व सड़क किनारे विक्रेताओं को सिखाया जा रहा है कि केले के छिलकों या ब्रोकली की डंठल को फेंकने के बजाय किस तरह से इस्तेमाल में लाया जा सकता है।

पिछले वर्ष, यूएनईपी ने अपने साझेदार संगठनों के साथ मिलकर ब्राज़ील में यूएन जलवायु सम्मेलन (कॉप31) के दौरान एक पहल (Food Waster Breakthrough) को पेश किया था, जिसका लक्ष्य 2030 तक भोजन बर्बादी में 50 फ़ीसदी की कमी लाना, मीथेन उत्सर्जन को घटाना और जलवायु कार्रवाई को समर्थन देना है।

अन्य अहम उपाय:
हम जिस भोजन को उगा चुके हैं, उसे अधिक दक्षता व समझदारी के साथ इस्तेमाल में लाना ज़रूरी है, ताकि भूमि व वनों पर दबाव कम हो और अधिक संख्या में लोगों तक खाद्य सामग्री पहुँचाई जा सके।

स्वस्थ वनों से मिट्टी की रक्षा होती है, वर्षा नियमित रूप से होती है और इससे खाद्य उत्पादन को समर्थन मिलता है।

भोजन की देखरेख, समुचित भंडारण व परिवहन व्यवस्था में निवेश के ज़रिए भी भोजन हानि व बर्बादी में कमी लाना सम्भव है, जैसेकि जल्दी ख़राब होने वाली खाद्य सामग्री के लिए ‘कोल्ड चेन’ प्रणाली को मज़बूत बनाना।

ठंडे तापमान में खाद्य सामग्री के भंडारण, परिवहन और बेहतर देखरेख की व्यवस्था से, सूखे, बाढ़, खाद्य क़िल्लत समेत अन्य जलवायु प्रभावों से निपटा जा सकता है।

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