लखनऊ और कानपुर के बीच निर्माणाधीन एक्सप्रेस-वे का इंतजार पूरा होने वाला है। अब इस पर जल्दी ही गाड़ियां दौड़ेंगी। इस मार्ग का सफर दो से तीन घंटे में पूरी होने वाली दूरी को मात्र 30 से 40 मिनट में पूरी कर सकेगी।

साल 2023 में शुरू हुई यह परियोजना अब अपने अंतिम चरण में है। लखनऊ-कानपुर के बीच सफर करने वाले लोगों के लिए यह बड़ी राहत की खबर है। इसके साथ ही पिछले कई सालों से इस एक्सप्रेस-वे का इंतजार करने वालों की ख्वाहिश पूरी हो सकेगी।
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक़, फिलहाल कानपुर और लखनऊ के मध्य यात्रा का मुख्य विकल्प केवल जाजमऊ गंगापुल का है। इस मार्ग पर दिनभर भारी ट्रैफिक रहता है, जिससे लोगों को घंटों जाम में फंसे रहना पड़ता है। यहाँ सुबह और शाम के समय हालात और भी बदतर हो जाते हैं। वहीँ गंगा बैराज की ओर जाने वाले मार्ग पर सरैंया क्रासिंग पर रेलवे ओवरब्रिज का निर्माण कार्य भी चल रहा है, जिसमें अभी कुछ महीने और लगने की संभावना है।
लखनऊ की ओर यह एक्सप्रेस वे पिपरसंड से शुरू होता है जबकि कानपुर की ओर जाजमऊ गंगा पुल से करीब दो किलोमीटर आगे बढ़ने पर एक्सप्रेस वे का रास्ता खुलता है। लखनऊ की ओर आने वाले मुसाफिर यहां से होकर नवाबगंज, बंथरा, बनी, दतौली कांठा, तौरा, नीरना, अमरसस और रावल होते हुए यात्री उन्नाव के आजाद चौक तक सफर कर सकेंगे।
ऐसे में यात्रियों के लिए एक्सप्रेस वे का खुलना एक बड़ी राहत जैसा है। इस सुविधा के शुरू होने से छात्रों सहित रोजाना यात्रा करने वाले नौकरीपेशा लोगों, व्यापारियों, और आपात सेवाओं को सीधा फायदा मिल सकेगा।
आधुनिक तकनीक से तैयार इस एक्सप्रेस वे का करीब 18 किलोमीटर का हिस्सा एलिवेटेड बनाया गया है, जबकि लगभग 45 किलोमीटर का हिस्सा ग्रीनफील्ड रूट जैसा है। इस मार्ग के निर्माण में करीब 4700 करोड़ की लागत आई है। यात्रियों की सुरक्षा और सुविधा का भी पूरा ध्यान रखा गया है। एक्सप्रेस वे पर तीन बड़े पुल, 28 छोटे पुल और 38 अंडरपास बनाए गए हैं। इसके अलावा छह फ्लाईओवर और चार इंटरचेंज भी दिए गए हैं, जिससे ट्रैफिक संबंधी व्यवधान को न्यूनतम किया जा सके।











