उत्तर प्रदेश के इस जांबाज़ ने नेपाल की बर्फ से ढकी चोटियों पर तिरंगा फहराकर पूरे देश को गौरवान्वित किया है। यह कारनाम करने वाले आशीष दीक्षित उन्नाव जिले के बजलामाओ गाँव निवासी और उत्तर प्रदेश पुलिस के एटीएस कमांडो हैं।

कमांडो आशीष दीक्षित उन्नाव जनपद के गंगाघाट कोतवाली क्षेत्र के कर्मी बिझलामऊ गांव से है। आशीष दीक्षित ने नेपाल के मिनांग जिले में 7,126 मीटर ऊँची हिमलंग पर्वत चोटी पर तिरंगा फहराया।
3 नवंबर, 2025 की रात जब तापमान शून्य से 25 डिग्री नीचे चला गया था, हर तरफ बर्फीला तूफान चल रहा था और हिमस्खलन का खतरा हर लम्हे बना हुआ था, उस समय कमांडो आशीष ने अपने जुनून और साहस से यह कारनामा अंजाम दिया और बर्फ से ढकी चोटियों पर तिरंगा फहराकर पूरे देश को गौरवान्वित किया है
आशीष ने 15 अक्टूबर से इस कठिन पर्वतारोहण अभियान की शुरुआत की थी। यहाँ हर कदम पर चुनौतियाँ थीं। तेज़ हवाएँ, ऑक्सीजन की कमी और खड़ी बर्फीली ढलानें, लेकिन आशीष ने हार नहीं मानी। उनका हौसला बुलंद था। अंततः, उन्होंने 7,126 मीटर की ऊँचाई पर पहुँचकर भारतीय तिरंगा फहराया।
बताते चलें हिमलुंग हिमाल कोई साधारण पर्वत नहीं है। यह नेपाल-तिब्बत सीमा पर पेरी हिमाल पर्वतमाला का हिस्सा है और इसे दुनिया की सबसे कठिन चोटियों में से एक माना जाता है। हर साल कुछ ही पर्वतारोही इसे फतह कर पाते हैं, लेकिन कमांडो आशीष दीक्षित के लिए यह पहली बार नहीं था जब उन्होंने इतनी ऊँचाई फतह की हो।
उन्होंने इससे पहले कई प्रमुख चोटियों पर विजय प्राप्त की है। माउंट किलिमंजारो (अफ्रीका), माउंट एल्ब्रस (रूस), कांग यात्से, स्टोक कांगड़ी, माउंट युनम, गरुड़ पीक, बी.सी. राय पीक, केदारकांठा और नाग टीबा – इन सभी पर उन्होंने भारतीय ध्वज फहराया है।
2020 में, उत्तर प्रदेश के पुलिस महानिदेशक ने उन्हें उनके साहस और विशिष्ट सेवाओं के लिए “रजत पदक” से सम्मानित किया। वर्तमान में आशीष दीक्षित लखनऊ में एसपीओटी (स्पेशल पुलिस ऑपरेशन टीम) में फिजिकल ट्रेनर के रूप में कार्यरत हैं, जहां वे पुलिस कर्मियों को फिटनेस, अनुशासन और देशभक्ति का पाठ पढ़ाते हैं। आशीष की हिमलुंग हिमाल पर तिरंगा फहराने की यह सफलता उनके अनुशासन, साहस और दृढ़ निश्चय की दलील है।
