महानतम संगीतकार के रूप में एक अद्वितीय विरासत छोड़ गए हैं उस्ताद ज़ाकिर हुसैन

भारतीय तबला वादक उस्ताद जाकिर हुसैन का अमरीका में निधन हो गया। लंबे समय से बीमार ज़ाकिर हुसैन का निधन सोमवार हुआ। उन्हें दिल और फेफड़ों से जुड़ी स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं थीं।

महानतम संगीतकार के रूप में एक अद्वितीय विरासत छोड़ गए हैं उस्ताद ज़ाकिर हुसैन

लोकप्रिय संगीतकार और तबला वादक उस्ताद जाकिर हुसैन की उम्र 73 वर्ष थी। उनके पिता अल्लाह रक्खा भी मशहूर तबला वादक थे। उन्होंने कथक नृत्यांगना से विवाह किया था। उनके परिवार में उनकी पत्नी और दो बेटियां हैं।

उस्ताद जाकिर हुसैन काफी समय से अस्वस्थ थे, बीमारी के चलते उनके कई संगीत कार्यक्रम भी रद्द कर दिए थे। तबीयत बिगड़ने के बाद उन्हें सैन फ्रांसिस्को के एक अस्पताल में भर्ती कराया गया था। अमरीका के पब्लिक ब्रॉडकास्टर नेशनल पब्लिक रेडियो (एनपीआर) ने ज़ाकिर हुसैन के परिवार का बयान छापा है।

बयान इस तरह है- “एक शिक्षक के रूप में उनके काम ने अनगिनत संगीतकारों पर एक अमिट छाप छोड़ी है। उन्होंने अगली पीढ़ी को आगे बढ़ने के लिए प्रेरित किया। वह एक सांस्कृतिक राजदूत और महानतम संगीतकार के रूप में एक अद्वितीय विरासत छोड़ गए हैं।”

उस्ताद जाकिर हुसैन के पिता उस्ताद अल्लाह रक्खा का जन्म जम्मू-कश्मीर के एक सैनिक परिवार में हुआ था। एक भारतीय तबला वादक के रूप में उन्होंने इस फन को न सिर्फ ऊंचाइयों पर पहुँचाया बल्कि सारी दुनिया में ख्याति भी बटोरी।

सैनिक परिवार में जन्मे अल्लाह रक्खा सात भाइयों में सबसे बड़े थे और उनके पिता यानी उस्ताद जाकिर हुसैन के दादा नहीं चाहते थे कि वह संगीत की शिक्षा लें।

कहते हैं कि अल्ला रक्खा जब 12 बरस के थे तो वह अपने चाचा से मिलने गुरदासपुर गए। यहीं पर उन्होंने पहली बार तबला देखा और उसके असर में ऐसा आये कि पंजाब स्कूल ऑफ क्लासिकल म्यूजिक (घराना) में संगीत की शिक्षा लेने लगे। अल्लाह रक्खा ने उस्ताद मियां खादरबख्श पखावजी की सरपरस्ती में इस फन को सीखा। संगीत के प्रति समर्पण और गहरी रूचि ने उन्हें महान तबला वादक बनाया।

जाकिर हुसैन की शुरूआती पढ़ाई मुंबई के माहिम स्थित सेंट माइकल स्कूल से हुई थी और इसके बाद ग्रेजुएशन के लिए वह मुंबई के सेंट जेवियर्स कॉलेज गए।

जाकिर हुसैन के पिता ने दो शादियां की थीं। उनकी पहली पत्नी बावी बेगम से तीन बेटे, जाकिर हुसैन, फजल कुरैशी और तौफीक कुरैशी तथा दो बेटियां खुर्शीद और रजिया थीं। दूसरी शादी जीनत बेगम से हुई और इनसे एक बेटी रूही बानो और बेटा साबिर था।

1978 में जाकिर हुसैन ने अपनी इटैलियन मैनेजर कथक नृत्यांगना एंटोनिया मिनीकोला से शादी की थी। नृत्य सीखने के दौरान उनकी कैलिफोर्निया में ज़ाकिर हुसैन से मुलाकात
हुई थी। उनकी दो बेटियां हैं, अनीसा कुरैशी और इजाबेला कुरैशी हैं। अनीसा एक फिल्म निर्माता और इजाबेला नृत्य के क्षेत्र में हैं।

उस्ताद जाकिर हुसैन सारी उम्र अपने कैरियर के लिए पिता अल्लाहरखा के शुक्रगुज़ार रहे। उन्होंने भारत के साथ-साथ विदेशों में खूब नाम कमाया। ढेरों ढेर फिल्मों के लिए काम किया।

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