आईटीयू यानि अन्तरराष्ट्रीय दूरसंचार संघ का कहना है कि बच्चों को निशाना बनाए जाने के तौर-तरीक़ों की संख्या बेहद चिन्ताजनक है। दिशा-निर्देशों और सिफ़ारिशों वाले इस साझा वक्तव्य को आईटीयू सहित कई प्रमुख एजेंसियों ने जारी किया है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक़, इन संगठनों के अनुसार, अपराधी तत्व, एआई की मदद से बच्चों की अश्लील फ़र्ज़ी तस्वीरें भी तैयार कर रहे हैं, जिससे यौन शोषण और ब्लैकमेल करने का एक नया रूप सामने आया है।
इस सांबंध में निदेशक कॉस्मस ज़वाज़ावा का कहना है कि बच्चों को ऑनलाइन ‘Grooming’ यानि उन्हें हानिकारक नीयत रखने वाले लोगों के चंगुल में फँसाने के तरीक़ों से लेकर Deepfake तकनीक, हानिकारक तकनीकी विशेषताओं को, सोशल मीडिया मंंचों में शामिल किए जाने, साइबर मंचों पर डराए-धमकाए जाने (Bullying) और आपत्तिजनक सामग्री जैसे अनेक ख़तरों का सामना करना पड़ रहा है।
एआई-जनित हानिकारक ऑनलाइन सामग्री की बढ़ती मात्रा के मद्देनज़र, संयुक्त राष्ट्र के विभिन्न निकायों द्वारा बच्चों को शोषण, दुर्व्यवहार और मानसिक आघात से सुरक्षित रखने के लिए तत्काल और व्यापक उपाय अपनाए जाने की अपील की गई है।
आगे उन्होंने यह भी कहा कि कोविड-19 महामारी के दौरान यह समस्या और गम्भीर हुई, जब बड़ी संख्या में बच्चे, विशेष रूप से लड़कियाँ और युवा महिलाएँ, ऑनलाइन दुर्व्यवहार के शिकार हुए, और अनेक मामलों में इसका असर वास्तविक जीवन में शारीरिक हिंसा के रूप में भी सामने आया।
बच्चों के अधिकारों के लिए काम करने वाले संगठनों के मुताबि, अपराधी अब एआई तकनीक का इस्तेमाल करके, बच्चों की ऑनलाइन गतिविधियों, उनकी भावनात्मक स्थिति और रुचियों का विश्लेषण कर रहे हैं, ताकि उनके अनुरूप ‘ग्रूमिंग’ की रणनीति तैयार की जा सके।
बाल यौन शोषण और दुर्व्यवहार से जुड़े विश्वसनीय आँकड़े जुटाने के लिए स्थापित स्वतंत्र वैश्विक संस्था – The Childlight Global Child Safety Institute की 2025 की रिपोर्ट में पाया गया कि अमरीका में इस तकनीक ने, बाल दुर्व्यवहार के मामलों की संख्या 2023 में 4 हज़ार 700 से बढ़कर, 2024 में 67 हज़ार से अधिक हो गई।
ऑस्ट्रेलिया ने लगाया प्रतिबन्ध
संयुक्त राष्ट्र के सदस्य देश, ऑनलाइन सामग्री से बच्चों को होने वाले ख़तरों की गम्भीरता के मद्देनज़र अब कड़े क़दम उठा रहे हैं। वर्ष 2025 के अन्त में ऑस्ट्रेलिया दुनिया का ऐसा पहला देश बना, जिसने 16 वर्ष से कम उम्र के बच्चों के लिए सोशल मीडिया अकाउंट पर प्रतिबन्ध लगाया। सरकार ने इसके पीछे यह तर्क दिया कि सोशल मीडिया से होने वाले जोखिम, इसके सम्भावित फ़ायदों से कहीं अधिक हैं।
ऑस्ट्रेलिया की सरकार द्वारा तैयार कराई गई एक रिपोर्ट में सामने आया कि 10 से 15 वर्ष की आयु के लगभग दो-तिहाई बच्चों ने नफ़रत फैलाने वाली, हिंसक या मानसिक रूप से परेशान करने वाली सामग्री देखी थी, जबकि आधे से अधिक बच्चे साइबर बुलिंग के शिकार हुए थे। इनमें से अधिकांश गतिविधियाँ सामग्री सोशल मीडिया मंचों पर ही घटित हुईं। ऑस्ट्रेलिया के बाद मलेशिया, ब्रिटेन, फ़्रांस और कैनेडा जैसे अन्य देश भी ऐसे ही प्रतिबन्धों या सख़्त नियमों की तैयारी कर रहे हैं।














