धरती को बचाने की गुहार लगा रहे हैं यूएन पर्यावरण के जानकार

बदलती जलवायु और इको सिस्टम ने धरती को गम्भीर जोखिम के सामने ला खड़ा किया है। विशेषज्ञ इन सभी चुनौतियों के लिए मानवता को ज़िम्मेदार मानते हैं।

धरती को बचाने की गुहार लगा रहे हैं यूएन पर्यावरण के जानकार

संयुक्त राष्ट्र प्रमुख एंतोनियो गुटेरेस ने केनया की राजधानी नैरोबी में यूएन पर्यावरण सभा (UNEA) के छठे संस्करण को सम्बोधित करते हुए विश्व नेताओं से जलवायु समाधानों को आगे बढ़ाने की गुहार लगाईं है। पर्यावरण सभा के लिए उन्होंने अपने वीडियो सन्देश में ज़ोर देकर कहा कि बेहतरी के प्रयासों की सख़्त आवश्यकता है।


“मनुष्यों, पशुओ व पर्यावरण के बीच बेहद नज़दीकी मगर नाज़ुक सम्बन्ध है।”-टैड्रॉस एडहेनॉम घेबरेयेसस


महासचिव गुटेरेस ने UNEA-6 के उच्चस्तरीय खंड के लिए अपने सम्बोधन में बताया कि पृथ्वी के समक्ष अनेक पर्यावरणीय संकट मौजूद हैं, ज़हरीली होती जा रही नदियों से, बढ़ते हुए समुद्री जल स्तर आदि।

इसके मद्देनज़र, उन्होंने नवीकरणीय ऊर्जा की दिशा में तेज़ी से आगे बढ़ने, चरम मौसम घटनाओं के प्रति सहन सक्षमता विकसित करने और जलवायु न्याय सुनिश्चित करने समेत अन्य उपायों पर ज़ोर दिया है।

उन्होंने कहा- “यूएन पर्यावरण सभा की इन प्रयासों में अहम भूमिका है। आपने दर्शाया है कि आप एकजुट होकर नतीजा दे सकते हैं, जैसा कि हाल ही में प्लास्टिक सन्धि पर सहमति बनाने का ऐतिहासिक निर्णय।”

यूएन महासभा के अध्यक्ष डेनिस फ़्रांसिस ने भी यूएन सभा को अपने सम्बोधन में मुख्य रूप से एक स्वस्थ पर्यावरण व टिकाऊ विकास लक्ष्यों के वादे को साकार करने पर बल दिया।

आगे उन्होंने कहा कि टिकाऊ विकास लक्ष्यों में पृथ्वी व आम लोगों के लिए एक समृद्ध व न्यायसंगत भविष्य का ब्लूप्रिंट दिया गया है, मगर यह ध्यान रखना होगा कि फ़िलहाल हम 2030 तक उन्हें हासिल करने की समय सीमा से बहुत दूर हैं। साथ ही, इसके ज़रिये प्रकृति के साथ सन्तुलन बहाल करने के लिए बहुपक्षीय उपायों को बढ़ावा देने की बात कही।

विश्व स्वास्थ्य संगठन के प्रमुख डॉक्टर टैड्रॉस एडहेनॉम घेबरेयेसस ने कहा है कि मनुष्यों, पशुओ व पर्यावरण के बीच बेहद नज़दीकी मगर नाज़ुक सम्बन्ध है।

यूएन एजेंसी प्रमुख के अनुसार, चरम मौसम घटनाओं की आवृत्ति और गहनता बढ़ने की वजह से हताहतों की संख्या बढ़ रही है, ताप लहरों के कारण रोगों में वृद्धि हो रही है, वायु प्रदूषण के कारण फेफड़ों के कैंसर, दमे समेत अन्य बीमारियों के मामले उछाल पर हैं।

बदलती जलवायु परिवर्तन के कारण मच्छरों, पक्षियों और अन्य पशुओं के व्यवहार, वितरण, आवाजाही और संख्या में बदलाव आए हैं, जिससे मलेरिया व डेंगू जैसी बीमारियाँ अब नए इलाक़ों में फैल रही हैं।

प्रतिनिधिमंडल का ध्यान मुख्य रूप से क्षेत्रीय व अन्तरराष्ट्रीय स्तर पर बहुपक्षीय पर्यावरणीय समझौतों पर केन्द्रित रहा है, जिनमें से कुछ 50 वर्ष से भी अधिक पुराने हैं।

इन समझौतों के ज़रिये प्रजातियों को लुप्त होने से बचाने, रासायनिक प्रदूषण को कम करने और ओज़ोन परत में आए छेद को भरने में मदद मिली है।

इस पृष्ठभूमि में, उन्होंने ऊर्जा, परिवहन, खाद्य व स्वास्थ्य प्रणालियों में रूपान्तरकारी बदलावों का आहवान किया है और कहा कि स्वास्थ्य स्थिति, जलवायु कार्रवाई का सबसे अहम कारण होना चाहिए।

गौरतलब है कि यूएन सभा का छठा संस्करण सोमवार को शुरू हुआ और शुक्रवार को इसका समापन हुआ। जिसमें 180 से अधिक देशों के प्रतिनिधियों ने प्रकृति-आधारित समाधानों, नुक़सानदेह कीटनाशकों, भूमि क्षरण, सूखे समेत अनेक अहम विषयों पर चर्चा की है।

विश्व में पर्यावरणीय मुद्दों पर यूएन पर्यावरण सभा, UNEA-6 सबसे बड़ा निर्णय-निर्धारण निकाय है, जिसका मक़सद प्रकृति व नागरिकों के बीच समरसता को फिर से बहाल करना है।

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