गाजा युद्ध के दो साल पूरे होने पर दुनियाभर के शहरों में लाखों लोगों ने फ़िलिस्तीनियों और सहायता बेड़े के गाजा पहुँचने के प्रयास के समर्थन में मार्च निकाला, रैलियाँ और प्रदर्शन किए और गाजा में नरसंहार को समाप्त करने की माँग की है।

इस बीच तुर्की, नीदरलैंड, बुल्गारिया, मोरक्को, स्पेन, फ्रांस, पुर्तगाल और ग्रीस सहित विभिन्न देशों में लाखों लोग सड़कों पर उतरे और इज़राइल के साथ व्यापारिक संबंधों को निलंबित करने पर ज़ोर दिया है। सबसे बड़ा प्रदर्शन तुर्की के शहर इस्तांबुल में हुआ, जहाँ हज़ारों नागरिकों ने आया सोफ़िया से गोल्डन हॉर्न के तट तक मार्च किया, जहाँ फ़िलिस्तीन और तुर्की के झंडों से सजी दर्जनों नावों ने उनका स्वागत किया।
नीदरलैंड में लगभग 2,50,000 लोग राजधानी एम्स्टर्डम में इकट्ठा हुए और सरकार से इज़राइल के खिलाफ सख्त रुख अपनाने की मांग की। केंद्रीय संग्रहालय चौक पर इकट्ठा होने के बाद, प्रदर्शनकारियों ने फ़िलिस्तीनी झंडे और शांति चिन्हों के साथ शहर के केंद्र में मार्च किया। प्रदर्शनकारियों ने बैनर पकड़े हुए थे जिन पर लिखा था: “गाज़ा: भूख युद्ध का एक हथियार है” और “गाज़ा बच्चों का सबसे बड़ा कब्रिस्तान है।” एक बैनर पर लिखा था: “हमें अपनी सरकार पर शर्म आती है।”
संयुक्त राष्ट्र प्रवक्ता स्तेफ़ान दुजैरिक ने न्यूयॉर्क में नियमित प्रैस वार्ता में बताया कि गाज़ा में युद्धबंदी के लिए मिस्र में अप्रत्यक्ष वार्ता शुरू हो गई है। यह युद्ध ठीक दो साल पहले शुरू हुआ था।
मिस्र, इसराइल और हमास के बीच युद्ध को समाप्त करने के लिए क़तर व संयुक्त राज्य अमरीका के साथ मध्यस्थता कर रहा है। शुक्रवार को हमास ने कहा था कि वह 20-सूत्रीय अमरीकी शान्ति प्रस्ताव के महत्वपूर्ण हिस्सों पर सहमत है, जिसमें फ़लस्तीनी क़ैदियों की रिहाई के बदले में सभी इसराइली बन्धकों को जीवित और मृत रिहा करना शामिल है।
ग़ाज़ा में शान्ति बहाल करने के लिए संयुक्त राष्ट्र के प्रवक्ता ने कहा है कि आने वाले दिनों में अमरीकी शान्ति योजना पर सहमति बनने की स्थिति में वहाँ यूएन सहायता दल अकाल, व्यापक भुखमरी और कुपोषण को कम करने के लिए, हज़ारों टन सहायता सामग्री पहुँचाने के लिए तैयार हैं।
इस बीच सोमवार को संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंतोनियो गुटेरेस ने ग़ाज़ा में बन्धक बना कर रखे गए सभी लोगों को बिना शर्त, तत्काल रिहा किए जाने की अपनी अपील दोहराई है। यूएन प्रमुख ने यह बात दक्षिणी इसराइल में हमास व अन्य हथियारबन्द गुटों द्वारा किए गए हमलों के दो वर्ष होने पर कही।
इज़रायली हमलों में सेना द्वारा ग़ाज़ा में बड़े पैमाने पर सैन्य कार्रवाई में अब तक 67 हज़ार फ़लस्तीनियों की जान जा चुकी है और 1 लाख 70 हज़ार लोग घायल हुए हैं। वहीँ एक और अनुमान के अनुसार, ग़ाज़ा में फ़िलहाल 48 बन्धक हैं। इनमें से क़रीब 20 के जीवित होने सम्भावना है और 28 की मौत हो चुकी है।
गौरतलब है कि मिस्र के शर्म-अल-शेख़ में इसराइल और हमास के वार्ताकारों के बीच अप्रत्यक्ष वार्ता जारी है, जिसमें संयुक्त राज्य अमेरिका द्वारा सुझाई गई 20 सूत्री शान्ति योजना पर पूर्ण सहमति बनाने के प्रयास हो रहे हैं।
वहीँ हमास ने अमरीकी योजना के कुछ हिस्सों को स्वीकार करने के लिए हामी भरी है, जिसमें सभी बन्धकों की रिहाई भी है। लेकिन पूर्ण रूप से हथियार डालने और युद्ध के बाद हमास की भूमिका पर सवाल बरक़रार हैं।
महासचिव के अनुसार, और अधिक रक्तपात को रोकने और शान्ति का मार्ग प्रशस्त करने के लिए एक स्थाई युद्धविराम और एक विश्वसनीय राजनैतिक प्रक्रिया बहुत आवश्यक हैं। उन्होंने भरोसा दिलाया कि एक स्थाई शान्ति को समर्थन प्रदान करने के लिए संयुक्त राष्ट्र प्रतिबद्ध है। एक ऐसी शान्ति, जिसमें इसराइली, फ़लस्तीनी और क्षेत्र के सभी लोग एक दूसरे के साथ सुरक्षा, गरिमा और पारस्परिक सम्मान के साथ रह सकें।














