इस वर्ष का नोबेल शांति पुरस्कार वेनेज़ुएला की विपक्षी नेता और राजनीतिज्ञ ‘मारिया कोरिना मचाडो’ को दिए जाने की घोषणा की गई है। मारिया वेनेज़ुएला के विपक्षी दल की एक महत्वपूर्ण नेता और पूर्व संसद सदस्य हैं। उन्हें 10 दिसंबर को अल्फ्रेड नोबेल की पुण्यतिथि पर विजेताओं को पुरस्कार मिलेगा।

इस घोषणा के साथ राजनीतिक पर्यवेक्षकों का कहना है कि नोबेल समिति ने स्पष्ट संदेश दिया है कि शांति स्थापित करने के लिए केवल राजनीतिक बयानों की ही नहीं, बल्कि व्यावहारिक संघर्ष और बलिदान की भी आवश्यकता होती है।
कौन हैं मारिया कोरिना मचाडो
नॉर्वेजियन नोबेल समिति ने वेनेजुएला की जनता के लिए लोकतांत्रिक अधिकारों को बढ़ावा देने और तानाशाही से लोकतंत्र में न्यायपूर्ण और शांतिपूर्ण परिवर्तन हासिल करने के उनके अथक प्रयास के लिए मारिया कोरिना मचाडो को 2025 का नोबेल शांति पुरस्कार देने का फैसला किया है। हाल के दिनों में लैटिन अमरीका में वेनेजुएला में लोकतंत्र आंदोलन की नेता के रूप में मारिया कोरिना मचाडो को नागरिक साहस के सबसे असाधारण उदाहरणों में से एक के रूप में देखा जाता है।
मचाडो विभाजित वेनेजुएला के विपक्ष को एकजुट करने के लिए जानी गई हैं। उनके नेतृत्व में वहां का विपक्ष स्वतंत्र चुनाव और प्रतिनिधि सरकार की मांग के लिए एक साथ आया। ऐसे समय में जब लोकतंत्र खतरे में है, इस सामान्य आधार की रक्षा करना पहले से कहीं अधिक महत्वपूर्ण है।
डोनाल्ड ट्रंप का सपना अधूरा रह गया
नोबेल शांति पुरस्कार के एलान के साथ ही एक और नाम सुर्ख़ियों में आया और हर तरफ यह चर्चा सुनी गई कि अमरीकी राष्ट्रपति ट्रंप की नेबेल प्राइज़ पाने की चाहत एक हसरत ही रह गई। नोबेल समिति ने लंबे विचार-विमर्श के बाद, इस वर्ष का पुरस्कार उन व्यक्तियों को देने का फैसला किया जो लोकतंत्र और मानव स्वतंत्रता के प्रचार-प्रसार के क्षेत्र में प्रत्यक्ष रूप से सक्रिय रहे हैं।
ट्रंप काफी अरसे से नोबेल पुरस्कार के लिए अपनी उम्मीदवारी की की बात कर रहे थे। इस बीच उन्हें कुछ देशों और विश्व नेताओं का समर्थन भी मिला था। लेकिन नोबेल शांति पुरस्कार समिति ने ट्रंप की उम्मीदवारी और विश्व शांति के लिए उनके प्रयासों, जिनका उन्होंने ज़िक्र किया था, को नज़रअंदाज़ कर दिया और यह पुरस्कार एक महिला के हिस्से आया।
घोषणा से कुछ घंटे पहले ही ट्रंप ने कहा था कि अगर मुझे यह पुरस्कार नहीं दिया गया, तो यह हमारे देश का अपमान होगा। दिलचस्प बात यह है कि इस साल नोबेल शांति पुरस्कार के उम्मीदवारों में अमरीकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को माल्टा के विदेश मंत्री इयान बोर्ग ने नामित किया था, जिन्होंने कहा था कि ट्रंप ने अंतरराष्ट्रीय विवादों में मध्यस्थता करने और मध्य पूर्व में तनाव कम करने के लिए महत्वपूर्ण प्रयास किए हैं।
क्योंकि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप इस साल शांति पुरस्कार को लेकर बेहद आशावादी थे और घोषणा से कुछ घंटे पहले उन्होंने कहा था कि अगर मुझे यह पुरस्कार नहीं दिया गया, तो यह हमारे देश का बहुत बड़ा अपमान होगा। ट्रंप की इस विफलता पर सोशल मीडिया पर व्यंग्यात्मक टिप्पणियाँ की जा रही हैं। उपयोगकर्ता टिप्पणियों में कह रहे हैं कि नोबेल शांति पुरस्कार जीतने के लिए केवल “पेसमेकर” होना ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि निरंतर और सिद्ध प्रदर्शन एक पूर्वापेक्षा है।
बताते चलें कि इस वर्ष कुल मिलाकर 338 व्यक्तियों और संगठनों को शांति पुरस्कार के लिए नॉमिनेट किया गया था। यह पूरी सूची अगले 50 वर्षों तक गुप्त रखी जाएगी।













