यूएन चार्टर केवल चर्मपत्र और स्याही नहीं बल्कि देशों के बीच शान्ति, सम्मान व सहयोग का वादा है- यूएन प्रमुख

अबसे ठीक 80 साल पहले 26 जून 1945 को यूएन चार्टर पर हस्ताक्षर किए गए थे। इस पर 1945 में कैलीफ़ोर्निया के सैन फ्रांसिस्को शहर में हस्ताक्षर किए गए थे।

यूएन चार्टर केवल चर्मपत्र और स्याही नहीं बल्कि देशों के बीच शान्ति, सम्मान व सहयोग का वादा है- यूएन प्रमुख

संयुक्त राष्ट्र के अस्तित्व के 80 वर्ष पूरे होने के अवसर पर, मुख्यालय में एक प्रदर्शनी शुरू हुई है जिसका नाम है- “सैन फ़्रांसिस्को की भावना में फिर से जान फूँकना”।

लगभग 50 देशों के प्रतिनिधियों ने द्वितीय विश्व युद्ध के बाद के माहौल में, 1945 में एक ऐसा विश्व संगठन बनाने के लिए, सैन फ़्रांसिस्को में एक बैठक की, जो “फिर कभी नहीं” के विचार के लिए प्रतिबद्ध हो, यानि इस तरह का युद्ध दुनिया को फिर कभी तबाह नहीं करेगा।

यूएन चार्टर केवल “चर्मपत्र और स्याही भर से कहीं अधिक है; यह देशों के बीच शान्ति, सम्मान व सहयोग का वादा है।” संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंतोनियो गुटेरेश ने यूएन मुख्यालय में सोमवार को यह बात, ‘यूएन चार्टर’ का स्वागत करते हुए कही।

एंतोनियो गुटेरेश ने इस प्रदर्शनी का अवलोकन करते हुए कहा कि यूएन चार्टर केवल शुरुआत थी, जिसमें ऐसे विचार और सिद्धान्त शामिल थे, जिन्हें दुनिया दैनिक जीवन में लागू करने के लिए काम करती है।

संयुक्त राष्ट्र महासभा के अध्यक्ष फिलेमॉन यैंग ने इस प्रदर्शनी को देखते हुए कहा- “युद्ध व टकराव और मानवीय पीड़ा के अन्तहीन चक्रों में फँसी दुनिया के लिए, (यूएन) चार्टरऔर इसके द्वारा दर्शाए गए संवाद, कूटनीति, सहयोग व एकजुटता जैसे सिद्धान्त, एक बेहतर, अधिक शान्तिपूर्ण और समृद्ध भविष्य का मार्ग था।”

हालाँकि, यह वैश्विक दस्तावेज़, हस्ताक्षर करने वाले देशों के विधायी निकायों द्वारा इसकी पुष्टि किए जाने के बाद, 24 अक्टूबर 1945 को प्रभावी हुआ।

संयुक्त राष्ट्र चार्टर को स्वीकृति मिलने के बाद से, 1948 के मानवाधिकारों की सार्वभौमिक घोषणा और 2024 के ‘भविष्य के लिए समझौते’ सहित अन्य अनेक ऐतिहासिक अन्तरराष्ट्रीय समझौतों का मार्ग प्रशस्त हुआ है। संयुक्त राष्ट्र में वर्तमान में 193 सदस्य देश शामिल हैं।

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