विश्व भर में, डिजिटल टैक्नॉलॉजी, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और अन्य तकनीकों के इस्तेमाल में उछाल आया है। नतीजे में इन माध्यमों पर नफ़रत फैलाने वाले सन्देशों व भाषणों (Hate Speech) का प्रभाव भी कई गुना बढ़ा है।

‘हेट स्पीच के विरुद्ध अन्तरराष्ट्रीय दिवस’ से ठीक पहले, 18 जून को न्यूयॉर्क स्थित संयुक्त राष्ट्र मुख्यालय में एक कार्यक्रम आयोजित किया गया, जिसमें एआई और हेट स्पीच के बीच सम्बन्ध और इसके समाधान में टैक्नॉलॉजी की भूमिका पर ध्यान केन्द्रित किया गया। इसका उद्देश्य विश्व भर में समावेशी और सुरक्षित डिजिटल स्पेस को बढ़ावा देना था।
‘वैश्विक डिजिटल कॉम्पैक्ट’ को अब तक 193 देशों का समर्थन मिल चुका है और सूचना सत्यनिष्ठा पर यूएन के वैश्विक सिद्धान्तों’ के ज़रिए सरकारों, शोधकर्ताओं और एआई विशेषज्ञों की सिफ़ारिशों के आधार पर एक सकारात्मक बदलाव लाने की कोशिश की जा रही है।
ऑनलाइन माध्यमों के ग़लत प्रयोग और उन पर नफ़रत भरे सन्देश से उपजी चुनौतियों के मद्देनज़र, यूएन ने इसे रोकने के लिए तत्काल ठोस क़दम उठाए जाने पर भी ज़ोर दिया है।
संयुक्त राष्ट्र ने निरन्तर आगाह किया है कि इन माध्यमों से जहाँ एक ओर कमज़ोर समुदायों को निशाना बनाया जा रहा है वहीँ आपसी टकराव को हवा देने की भी कोशिशें हो रही हैं। इन सबके पीछे बड़े पैमाने पर डीपफेक यानी असली नज़र आने झूठे वीडियो, सोशल मीडिया प्लैटफॉर्म्स पर साझा की जाने वाली भ्रामक जानकारी, और भेदभाव को बढ़ावा देने वाले सन्देशों से समाजों में दरारें पैदा हो रही हैं।
सभ्यताओं के गठबंधन पर संयुक्त राष्ट्र की उच्च प्रतिनिधि मिगेल एंजेल मोराटिनोस ने अपने सम्बोधन में चेतावनी दी कि आज हमें सार्वजनिक सोच में विकृति और नफ़रत फैलाने के नए ख़तरों का सामना करना पड़ रहा है, जिसमें एआई की भूमिका भी तेज़ी से बढ़ रही है। आगे उन्होंने कहा कि नस्ल, धर्म और पहचान के आधार पर समुदायों पर शारीरिक व भाषाई हमले, उपासना स्थलों, सांस्कृतिक धरोहरों और सम्पत्तियों को नुक़सान, और राजनीति में मानवता को नीचा दिखाने वाली बयानबाज़ी अब आम बात होती जा रही है।
उच्च प्रतिनिधि मोराटिनोस ने इसे ‘नफ़रत भरे सन्देश व भाषणों को सामान्य बना देने की प्रक्रिया’ बताते हुए कहा कि इस संकट से निपटने के लिए उतनी ही गम्भीरता और संसाधनों की ज़रूरत है जितनी किसी भी अन्य वैश्विक आपदा से निपटने में होती है।
उन्होंने अपने कार्यकाल की महत्वपूर्ण उपलब्धियों में यहूदीवाद विरोध (antisemitism) से निपटने के लिए कार्ययोजना, और हाल ही में इस्लामोफ़ोबिया (मुस्लिम विरोधी भावना) से मुक़ाबले के लिए विशेष दूत की नियुक्ति का उल्लेख किया।
उच्च प्रतिनिधि मोराटिनोस ने नफ़रत भरे भाषणों को राजनैतिक हथियार बनाने की प्रवृत्ति पर रोक लगाने का आग्रह किया. साथ ही, AI और डिजिटल जगत में तेज़ी से हो रहे बदलावों के बीच समावेशी, शान्तिपूर्ण और मानवाधिकार-आधारित सम्वाद को बढ़ावा देने पर बल दिया।
संयुक्त राष्ट्र वैश्विक संचार विभाग की अवर महासचिव मेलिसा फ़्लेमिंग ने कहा कि AI एक ऐसा उपकरण है, जो मौजूदा सूचना तंत्र को तेज़ी से बदल रहा है, और यह इतनी महीनता और तीव्रता से हो रहा है कि कई बार हमें पता भी नहीं चलता कि हमारी राय कैसे बन रही है।
अवर महासचिव फ्लेमिंग ने कहा कि ऐसी सामग्री इस्तेमाल आज कमज़ोर तबकों जैसे शरणार्थियों, महिलाओं, प्रवासियों और अल्पसंख्यकों के विरुद्ध नफ़रत फैलाने के लिए किया जा रहा है। यह चिन्ता का विषय है कि कुछ समूह वित्तीय या रणनैतिक लाभ के लिए इनका इस्तेमाल कर रहे हैं।

















