सितारे ज़मीं पर के असली सितारे हैं दस न्यूरो डाइवर्जेंट अदाकार

आमिर खान ने डिस्लेक्सिया जैसे विषय कुछ साल पहले ‘तारे जमीन पर’ बनाई और मेनस्ट्रीम सिनेमा को एक नई दिशा दे दी। अब ‘सितारे जमीन पर’ के जरिए आमिर खान ने एक और साहसिक कदम और बढ़ाया है। इस बार का उनका विषय- डाउन सिंड्रोम और न्यूरो डाइवर्जेंस है।

सितारे ज़मीं पर के असली सितारे हैं दस न्यूरो डाइवर्जेंट अदाकार

सैकनिल्क के अनुसार, फिल्म ने पहले दिन 11.5 करोड़ रुपए का कलेक्शन किया है। हिंदी बेल्ट में ‘सितारे ज़मीन पर’ ने 21.43 प्रतिशत की ऑक्यूपेंसी दर्ज की, जिसमें सबसे ज़्यादा दर्शक रात के शो में आए।

निर्देशक आर एस प्रसन्ना और लेखक दिव्य शर्मा के साथ मिलकर आमिर ने एक ऐसी दुनिया रची है, जहाँ हास्य और पीड़ा के साथ एक सत्य को सामने लाया गया है। इस फिल्म को जो बात खास बनाती है, वह है इसकी टोन। बिना किसी भावुकता और भाषणबाजी वाली यह फिल्म उनके बारे में है जिन्हे अकसर गलत समझ लिया जाता है।

इस फिल्म की सबसे अधिक प्रभावित करने वाली बात है, आमिर का एक्टर से स्टोरीटेलर बनने का सफर। जहाँ ‘तारे जमीन पर’ वह एक टीचर थे वहीँ ‘सितारे जमीन पर’ आमिर एक अहंकारी कोच बने हैं। फिल्म का सबसे ख़ास संवाद ‘सबका अपना-अपना नॉर्मल’ काफी लोकप्रिय हो रहा है।

फिल्म की कहानी गुलशन नाम के एक ऐसे आत्ममुग्ध बास्केटबॉल कोच की है, जिसे नशे में गाड़ी चलाने के अपराध में कोर्ट द्वारा समाज सेवा की सजा सुनाई जाती है। अब कोच को न्यूरो डाइवर्जेंट लोगों की एक टीम को कोचिंग देनी है।

शुरुआत में जो सिर्फ एक सजा थी वही बाद में कोच का नजरिया बदल देती है। उसकी असहजता, अनिच्छा और फिर स्वीकृति, सब एक ऐसी भावनात्मक सच्चाई को सामने लाते हैं, जो हमें भी खुद का आईना लगता है। आमिर ने गुलशन के किरदार के अहंकार और आत्मबोध को संतुलित तरीके से बड़ी ही ख़ूबसूरती से निभाया है।

जेनेलिया डिसूजा फिल्म में कोच की पत्नी के रूप में उनकी ऐसी साथी हैं जो उनके जीवन को एक इमोशनल टच देता है। मगर फिल्म के असली सितारे हैं दस न्यूरो डाइवर्जेंट ऐसे अभिनेता जिन्होंने अपनी अदाकारी से सभी का दिल लूट लिया है।

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