भारत की नागरिकता छोड़ने वाले भारतीय नागरिकों की दर बढ़कर चार गुना से ज़्यादा हुई

भारतियों का रोज़गार के बेहतर अवसरों के लिए विदेश की तरफ पलायन करने का आंकड़ा आश्चर्य में डालता है। वर्ष 2011 से 2022 तक भारत की नागरिकता छोड़ने वालों की संख्या 13.86 लाख है। इनमे से 7 लाख नागरिकों ने अमेरिका में बसना पसंद किया।

भारत की नागरिकता छोड़ने वाले भारतीय नागरिकों की दर बढ़कर चार गुना से ज़्यादा हुई

बीते 12 वर्षों में नागरिकता छोड़ने वालों में 97.5% नौकरी करने वाले हैं। एक और दिलचस्प तथ्य यह है कि नागरिकता छोड़ने वाले भारतीयों में करोड़पति लोगों की संख्या मात्र 2.5% है।

विदेश मंत्री एस जयशंकर ने लोकसभा में एक सवाल का जवाब देते हुए बताया कि जून 2023 तक 87,000 से अधिक भारतीयों ने अपनी नागरिकता छोड़ दी है।

विदेशमंत्री एस जयशंकर ने बताया कि बीते बारह वर्षों में 17.50 लाख से अधिक भारतीयों ने अपनी नागरिकता छोड़ दी है।नागरिक छोड़ने वाले लोग अब उस देश के नागरिक बन गए हैं, जहां वे जाकर बसे हैं।


भारतीय विदेश मंत्रालय से मिलने वाले आंकड़ों से पता चलता है कि 2010 तक भारत की नागरिकता छोड़ने वाले 7% की सालाना दर से बढ़ रहे थे जो अब बढ़कर 29% हो गई है।


हेनली प्राइवेट वेल्थ माइग्रेशन की 2023 की रिपोर्ट खुलासा करती है कि पेशेवर लोगों में विदेश जाने की होड़ पहले की तुलना में दोगुनी हो गई है। इस रिपोर्ट के मुताबिक़ भारत से पलायन करने वाले करोड़पतियों की संख्या में खास इजाफा नहीं हुआ है।

संसद में पेश किये गए आंकड़ों के अनुसार वर्ष 2022 में सर्वाधिक 2 लाख 25 हजार 620 लोगों ने भारत की नागरिकता छोड़ी। जबकि वर्ष 2021 में ये संख्या 1.63 लाख थी। सबसे कम पलायन वर्ष 2020 में देखने को मिला। इस वर्ष ये संख्या 85 हजार रही। वर्ष 2010 के बाद ये सबसे कम संख्या रही और इसका कारण कोरोना महामारी का काल होना था।

सारी दुनिया में पेशेवर लोगों के लिए अमरिका जबकि कारोबारियों के लिए ऑस्ट्रेलिया और सिंगापुर टॉप डेस्टिनेशन माने जाते हैं। अच्छी सैलरी के साथ कारोबार में मिलने वाली टैक्स की रियायत विदेश में बसने का बड़ा कारण है।

क्योंकि भारत में दोहरी नागरिकता रखना मुकिन नहीं ऐसे में किसी दूसरे देश में बसने की इच्छा रखने वाले नागरिकों को नागरिकता छोड़नी जरूरी है।

विदेश मंत्री द्वारा लोकसभा में दी गई जानकारी पर नज़र डालें तो पता चलता है कि वर्ष 2022 में 2,25,620 भारतीयों ने अपनी नागरिकता छोड़ी जबकि वर्ष 2021 में ऐसे लोगों की संख्या 1,63,370 थी। वर्ष 2020 में कोरोना काल के चलते ये संख्या 85,256 रही। इसी तरह से वर्ष 2019 में नागरिकता छोड़ने वालों की संख्या 1,44,017 जबकि 2018 में ये संख्या 1,34,561 तहत 2017 में 1,33,049 थी। इससे पूर्व वर्ष 2016 में 1,41,603 भारतीयों ने अपनी नागरिकता छोड़ी। वर्ष 2015 में 1,31,489 जबकि 2014 के लिए भारत की नागरिकता छोड़ने वालों का आंकड़ा 1,29,328 था।

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