भारत की प्रगति में इंटरनेट कनेक्टिविटी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है। हालांकि, देश के कुछ क्षेत्रों में इंटरनेट की पहुंच सीमित है, जिससे मौजूदा नेटवर्क के पूरक के रूप में सैटेलाइट इंटरनेट की आवश्यकता पर बल मिलता है।

अप्रैल-जून 2025 के दौरान दर्ज की गई 1,002.85 मिलियन इंटरनेट ग्राहकों की संख्या में भारत की डिजिटल क्रांति के पैमाने और सैटेलाइट इंटरनेट प्रभाव को दर्शाती है।
सैटेलाइट इंटरनेट एक ऐसी उभरती तकनीक है जिसमें अंतरिक्ष से किसी भी स्थान तक कनेक्टिविटी प्रदान करने की क्षमता है। यह इसे दूरदराज के गांवों, पहाड़ी इलाकों, सीमावर्ती क्षेत्रों और द्वीपों के लिए विशेष रूप से उपयोगी बनाता है, जहां स्थलीय इंटरनेट सेवाओं तक पहुंचना या तो मुश्किल है या आर्थिक रूप से अव्यावहारिक है। सैटेलाइट इंटरनेट, भूस्थिर कक्षाओं (GSO) या गैर-भूस्थिर कक्षाओं (NGSO) में स्थित सेटेलाइट के ज़रिए प्रदान की जाने वाली इंटरनेट सेवा है।
इस क्षेत्र की प्रमुख उपलब्धियाँ देखें तो पाते हैं-
अप्रैल-जून 2025 तक भारत में 1,002.85 मिलियन इंटरनेट ग्राहक हैं।
इंटरनेट की पहुंच ग्रामीण क्षेत्रों में प्रति 100 जनसंख्या पर लगभग 46 ग्राहकों तक है, जो डिजिटल विभाजन को पाटने के लिए उपग्रह इंटरनेट की आवश्यकता को रेखांकित करता है।
अंतरिक्ष क्षेत्र में सुधारों ने अंतरिक्ष गतिविधियों में निजी क्षेत्र की भागीदारी को सक्षम बनाया है।
भारत देश भर में तेज़ और अधिक विश्वसनीय ब्रॉडबैंड सेवाएं प्रदान करने के लिए LEO और MEO-आधारित उपग्रह इंटरनेट सेवाओं की ओर बढ़ रहा है।
भारत में लाइसेंस प्राप्त स्टारलिंक सहित 10 से अधिक उपग्रह ऑपरेटरों ने कदम रखा है, जिसमें निजी क्षेत्र को 100% तक प्रत्यक्ष विदेशी निवेश की अनुमति है।
सरकार ने 2020 में अंतरिक्ष गतिविधियों में निजी क्षेत्र की भागीदारी के द्वार खोलने के लिए अंतरिक्ष क्षेत्र सुधार लागू किए। इसे आगे बढ़ाते हुए भारतीय अंतरिक्ष नीति, 2023 ने अंतरिक्ष क्षेत्र में गैर-सरकारी संस्थाओं (एनजीई) के लिए एक समान अवसर मुहैया कराए, जिससे अंतरिक्ष गतिविधियों की संपूर्ण वैल्यू चेन में उनकी भागीदारी को शुरू से अंत तक सक्षम बनाया जा सके।
विकसित भारत 2047 के दृष्टिकोण के अनुरूप, उपग्रह इंटरनेट डिजिटल कनेक्टिविटी के एक प्रमुख प्रवर्तक के रूप में उभर रहा है, जो दूरस्थ और वंचित क्षेत्रों तक विश्वसनीय पहुंच प्रदान करता है, साथ ही रक्षा और आपदा प्रतिक्रिया में महत्वपूर्ण अनुप्रयोगों को सशक्त बनाता है।
अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी की शक्ति के माध्यम से, भारत अंतरिक्ष-आधारित संचार में अपनी रणनीतिक स्वायत्तता और नेतृत्व को सुदृढ़ कर रहा है, यह सुनिश्चित करते हुए कि कनेक्टिविटी का लाभ प्रत्येक नागरिक तक पहुंचे। एचटीएस के संचालन से लेकर उपग्रह संचार में निजी भागीदारी को सक्षम करने तक, देश लगातार अपने डिजिटल विभाजन को पाट रहा है।













