एक हालिया सर्वेक्षण में पता चला है कि युवा सोशल मीडिया पर ऐसी सामग्री देख रहे हैं जो उनके व्यक्तित्व और मानसिक स्वास्थ्य पर नकारात्मक प्रभाव डाल रही है।

कॉमन सेंस मीडिया नामक एक अमरीकी संगठन ने एक रिपोर्ट प्रकाशित की, जिसमें खुलासा किया गया कि 73 प्रतिशत किशोर लड़के नियमित रूप से “डिजिटल मर्दानगी” (digital masculinity) पर जोर देने वाली सामग्री के संपर्क में आते हैं, जिसमें लड़ाई, शक्ति प्राप्त करना और पैसा कमाना जैसे विषय शामिल होते हैं।
संस्था की रिपोर्ट के अनुसार, 73 प्रतिशत युवा इंटरनेट पर लड़ाई, ताकत और धन कमाने जैसी अवधारणाओं से प्रभावित हो रहे हैं, जबकि यह प्रवृत्ति विशेष रूप से किशोर लड़कों में देखी जा रही है।
रिपोर्ट में “डिजिटल पुरुषत्व” शब्द में लड़ाई और हथियारों से संबंधित पोस्ट शामिल हैं। शोध से यह संकेत भी मिलते हैं कि भले ही युवा लड़के सक्रिय रूप से इस सामग्री की तलाश न करें, सोशल मीडिया एल्गोरिदम उन्हें इन संदेशों के जाल में ले जाने का काम करता है।
यह शोध अक्टूबर 2025 में प्रकाशित हुआ था। इस शोध का फ़ोकस अध्ययन के माध्यम से युवा पुरुषों को प्रभावित करने वाली सामग्री पर ध्यान केंद्रित किया गया, जिसमें यह जाँच की गई कि सोशल मीडिया कैसे पुरुषत्व के कुछ संकीर्ण आदर्शों को बढ़ावा देता है।
अध्ययन से मिले नकारात्मक नतीजों में पाया गया कि इस प्रकार की सामग्री के संपर्क में आने वाले लड़कों में आत्म-सम्मान में कमी और अपनी भावनाओं को दबाने की संभावना अधिक होती है। इससे पता चलता है कि उन्हें अक्सर ऐसे संदेश भेजे जाते हैं जो “कमज़ोरी” दिखाने से हतोत्साहित करते हैं।
इस सामग्री के प्रकार की पड़ताल से पता चला कि रिपोर्ट में “डिजिटल पुरुषत्व” शब्द में लड़ाई और हथियारों से संबंधित पोस्ट शामिल हैं।इसमें पैसा कमाने और मांसपेशियां बनाने से संबंधित संदेश भी शामिल हैं।
शोध से यह संकेत भी मिलते हैं कि भले ही युवा लड़के सक्रिय रूप से इस सामग्री की तलाश न करें, सोशल मीडिया एल्गोरिदम उन्हें इन संदेशों के जाल में ले जाने का काम करता है।
सर्वेक्षण में पता चला है कि आत्मविश्वास की कमी, अकेलापन और भावनाओं को छिपाने जैसी आदतें उन लड़कों में आम हैं जो ऐसी सामग्री बार-बार देखते हैं। दिलचस्प बात यह है कि 68 प्रतिशत युवाओं ने स्वीकार किया कि वे इस सामग्री को स्वयं नहीं खोजते, बल्कि यह स्वतः ही उनके सोशल मीडिया फ़ीड पर आ जाती है।
विशेषज्ञों के अनुसार, यह सामग्री न केवल महिलाओं के प्रति नकारात्मक दृष्टिकोण को बढ़ावा देती है, बल्कि कुछ मामलों में हिंसा जैसे व्यवहार को भी बढ़ा सकती है। उन्होंने माता-पिता को सलाह दी कि वे अपने बच्चों से सोशल मीडिया के प्रभावों के बारे में बात करें और उनके मानसिक और सामाजिक विकास को बेहतर बनाने के लिए उन्हें सकारात्मक और स्वस्थ ऑफ़लाइन गतिविधियों में शामिल करें।
