डीएनए पर भी असर डालती है रोज़ाना शराब पीने की आदत

अमरीकी सर्जन जनरल ने चेतावनी दी है कि रोज़ाना शराब की आदत न सिर्फ डीएनए पर असर डालती है बल्कि कई तरह के कैंसर के लिए भी ज़िम्मेदार है।

डीएनए पर भी असर डालती है रोज़ाना शराब पीने की आदत

सर्जन जनरल के अनुसार, शराब कैंसर का कारण बनने के साथ डीएनए को भी नुकसान पहुंचाती है। इससे जुड़ी चेतावनी में कहा गया है कि शराब एसीटैल्डिहाइड में टूट जाती है, जो डीएनए को कई तरह से नुकसान पहुंचाती है।

अमरीका के सार्वजनिक स्वास्थ्य प्रवक्ता सर्जन जनरल विवेक मूर्ती के कार्यालय द्वारा जारी नई रिपोर्ट में जारी एक बयान में कहा गया है- “शराब का सेवन, तम्बाकू और मोटापे के बाद, संयुक्त राज्य अमरीका में कैंसर का तीसरा प्रमुख रोकथाम योग्य कारण है, जिससे कम से कम सात प्रकार के कैंसर का खतरा बढ़ जाता है।”


शराब के सेवन से जुड़े कैंसर के प्रकारों में मुंह का कैंसर, गले का कैंसर, स्वर तंत्र का कैंसर, ग्रासनली का कैंसर, स्तन कैंसर, यकृत कैंसर और पेट का कैंसर शामिल हैं।


शराब से सेहत के प्रभावित होने पर अमरीका के सार्वजनिक स्वास्थ्य प्रवक्ता सर्जन जनरल विवेक मूर्ती का कहना है कि रोज़ाना लिए जाने वाले शराब के दो पैग से सात किस्म के कैंसर का खतरा बढ़ जाता है।

साथ ही सर्जन जनरल ने इन अल्कोहलिक उत्पादों पर कैंसर से जुड़ी चेतावनी वाला लेबल लगाने का भी आह्वान किया है।सोशल मीडिया प्लेटफार्म एक्स पर एक बयान में जनरल मूर्ती ने कहा कि शराब के सेवन और कैंसर के बढ़ते खतरे के बीच मादक पेय पदार्थों पर लेबल लगाकर उपभोक्ताओं को कैंसर के खतरे के बारे में चेतावनी दी जानी चाहिए।

चेतावनी में आगे उन्होंने इस बात का भी ज़िक्र किया कि शराब देश में कैंसर का तीसरा प्रमुख कारण है जिसे प्रभावी उपायों से नियंत्रित किया जा सकता है। शराब के सेवन से जुड़े कैंसर के प्रकारों में मुंह का कैंसर, गले का कैंसर, स्वर तंत्र का कैंसर, ग्रासनली का कैंसर, स्तन कैंसर, यकृत कैंसर और पेट का कैंसर शामिल हैं।

इसमें आगे जानकारी दी गई है कि यह अमरीका में प्रतिवर्ष 100,000 कैंसर के मामलों और 20,000 कैंसर से होने वाली मौतों के लिए जिम्मेदार है, जो शराब से संबंधित यातायात दुर्घटनाओं में होने वाली 13,500 मौतों से अधिक है।

नई रिपोर्ट में सिफारिश की गई है कि स्वास्थ्य देखभाल प्रदाताओं को आवश्यकतानुसार शराब जांच और उपचार रेफरल को प्रोत्साहित करना चाहिए, तथा सामान्य जागरूकता बढ़ाने के प्रयासों का विस्तार किया जाना चाहिए।

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