नेशनल फार्मास्यूटिकल प्राइसिंग अथॉरिटी ने आदेश दिया है कि जीएसटी कटौती वाली दवाओं की एमआरपी संशोधन तुरंत किया जाए, जिससे उपभोक्ताओं को टैक्स में होने वाली कमी का सीधा लाभ पहुंच सके।

एनपीपीए यानी नेशनल फार्मास्यूटिकल प्राइसिंग अथॉरिटी द्वारा जारी एक महत्वपूर्ण आदेश में दवा निर्माताओं और मार्केटिंग कंपनियों को निर्देश दिया गया है कि जिन दवाओं पर हाल ही में जीएसटी दर में कटौती हुई है, उनके एमआरपी यानी अधिकतम खुदरा मूल्य में तुरंत बदलाव किया जाए।
मीडिया रिपोर्ट्स में कहा गया है कि एनपीपीए के अनुसार, दवाओं की कीमतों में वास्तविक कमी के लिए जब सरकार किसी दवा पर जीएसटी या कोई भी कर घटाती है, तो उस दवा की एमआरपी को उसी अनुपात में काम करना भी अनिवार्य होगा।ऐसे में उपभोक्ता तुरंत इसका लाभ उठा सकेंगे।
खबर के मुताबिक़, कंपनियों को इस आदेश के तहत केवल संशोधित प्राइस लिस्ट जारी करके रिटेलर्स और राज्य नियंत्रकों तक पहुंचाना होगा। साथ ही नेशनल फार्मास्यूटिकल प्राइसिंग अथॉरिटी की ओर से स्पष्ट किया गया है कि पहले से तैयार और स्टॉक में रखी गई दवाओं का रीलेबलिंग, रीस्टिकरिंग या रीकॉल अनिवार्य नहीं है।
बताते चलें कि पिछले दिनों जीएसटी दरों में बदलाव के कारण दवाओं की कीमतों में कमी आने की उम्मीद है। इसे ऐसे समझा जा सकता है कि जिन मेडिसिन पर जीएसटी दर 12 फीसद से घटाकर 5 फीसद कर दी गई है, वहीँ कुछ जीवनरक्षक दवाओं की दर को 5 फीसद से ज़ीरो फीसद कर दिया गया है। आम उपभोक्ताओं को इस कटौती से सीधे आर्थिक राहत मिलेगी।
कंपनियों को अतिरिक्त आर्थिक दबाव से बचने के लिए नेशनल फार्मास्यूटिकल प्राइसिंग अथॉरिटी ने कहा है कि कंपनियों को महंगी रि-लेबलिंग या स्टिकरिंग की आवश्यकता नहीं होगी। उन्हें केवल संशोधित प्राइस लिस्ट जारी करना काफी होगा, जिससे कानूनी अनुपालन भी सुनिश्चित रहे।
इस आदेश के बाद, बाजार में दवाओं की कीमतों में वास्तविक गिरावट आने की उम्मीद है, जिससे मरीजों के लिए इलाज सस्ता और किफायती होगा।














