वैश्विक सैन्य ख़र्च रिकॉर्ड स्तर पर पहुंचा- यूएन महासचिव

यूएन महासचिव ने युद्धों और गहराते भूराजनैतिक तनावों के बीच बढ़ते सैन्य खर्चों और उससे उपजने वाले ख़तरों पर चिन्ता जताई है। दरअसल दुनियभर में सैन्य बलों और शस्त्रों पर किए जाने वाला कुल ख़र्च, पिछले साल अभूतपूर्व ढंग से 2,700 अरब डॉलर के आँकड़े तक पहुँच गया।

वैश्विक सैन्य ख़र्च रिकॉर्ड स्तर पर पहुंचा- यूएन महासचिव

न्यूयॉर्क मुख्यालय में पत्रकारों से बातचीत के दौरान यूएन प्रमुख एंतोनियो गुटेरेस ने इस विषय में जो नई रिपोर्ट जारी की है उसके अनुसार,दुनिया में फ़िलहाल शान्ति निर्माण के बजाय युद्ध लड़ने में कहीं ज़्यादा ख़र्च हो रहा है।

यूएन प्रमुख ने बताया कि वर्ष 2024 के दौरान, विश्व के सभी पाँच क्षेत्रों में सुरक्षा आवश्यकताओं पर व्यय बढ़ा है। पिछले तीन दशकों में साल-दर-साल के नज़रिए से इसमें सबसे अधिक उछाल आया है। ऐसे में सैन्य बजट 2.7 ट्रिलियन डॉलर यानी 2,700 अरब डॉलर के लगभग पहुँच चुका है, जबकि विश्व भर में अत्यधिक निर्धनता को केवल 300 अरब डॉलर के ज़रिए समाप्त किया जा सकता है।

पिछले वर्ष शस्त्र सम्बन्धी ख़र्च चिन्ताजनक स्तर पर पहुँच गए, जोकि 2024 में यूएन के वार्षिक नियमित बजट का 750 गुणा हैं। सम्पन्न देशों के समूह (OECD) द्वारा प्रदान की जाने वाली कुल विकास सहायता धनराशि का यह क़रीब 13 गुणा है। यह सैन्य ख़र्च और सतत विकास के बीच चयन के टकराव को दर्शाता है।

यूएन प्रमुख के मुताबिक़, सैन्य बलों पर जहाँ और अधिक मात्रा में ख़र्च किया जा रहा है, सामाजिक निवेश, निर्धनता उन्मूलन, शिक्षा, स्वास्थ्य, पर्यावरण संरक्षण और बुनियादी ढाँचे में कम व्यय हो रहा है। उन्होंने ज़ोर देकर कहा कि आम लोगों में किया गया निवेश, किसी भी समाज में हिंसा के विरुद्ध रक्षा की पहली पंक्ति में निवेश है।

यूएन प्रमुख ने कहा कि मौजूदा सैन्य ख़र्च के आंशिक हिस्से को भी विकास की दिशा में मोड़े जाने से अहम खाइयों को पाटा जा सकता है। बच्चों को स्कूल भेजना, प्राथमिक स्वास्थ्य देखभाल को मज़बूती देना, स्वच्छ ऊर्जा में विस्तार लाना, बुनियादी ढाँचे का निर्माण करना और सर्वाधिक निर्बलों की रक्षा सम्भव होगी।

उन्होंने आगे कहा कि पिछले वर्ष और एक दशक में सैन्य बलों में जितना निवेश किया गया, उसके छोटे से हिस्से से, निम्न- और निम्नतर मध्य-आय वाले देशों में हर बच्चे की शिक्षा सुनिश्चित की जा सकती थी। यूएन प्रमुख ने बताया कि फ़िलहाल सतत विकास एजेंडा के क़रीब 20 फ़ीसदी लक्ष्य ही साकार होने की दिशा में बढ़ रहा है और टिकाऊ विकास का वादा जोखिम में है।

इतना ही नहीं जलवायु अनुकूलन प्रयासों को वित्तीय समर्थन और बाल कुपोषण का ख़ात्मा भी हो मुमकिन था, जिससे अन्तरराष्ट्रीय समुदाय टिकाऊ विकास लक्ष्यों को साकार करने के नज़दीक पहुँच जाता।

पत्रकार वार्ता में निरस्त्रीकरण मामलों के लिए यूएन प्रमुख इज़ूमी नाकामित्सु ने कहा कि वैश्विक प्राथमिकताओं में फिर से सन्तुलन क़ायम करना, विकल्प नहीं है. यह मानवता को बचाने के लिए अनिवार्य है।

इस रिपोर्ट के माध्यम से मानव-केन्द्रित और बहुआयामी दृष्टिकोण को अपनाने पर बल दिया गया है, जिसमें कूटनीति, अन्तरराष्ट्रीय सहयोग को प्राथमिकता दी जाए और सतत विकास का मार्ग प्रशस्त हो.

यूएन रिपोर्ट बताती है कि आर्थिक अवसरों के अभाव, निर्धनता, और अल्पविकास की वजह से अस्थिरता पनपती है, हिंसा को ईंधन मिलता है और सैन्य व्यय में उछाल आता है। इस संबंध में महासचिव ने कहा कि विकास और सतत सुरक्षा में निवेश के ज़रिए, हथियारों के लिए होड़ को रोका जा सकता है और सैन्य ख़र्च की मजबूरी से ही उबरा जा सकता है।

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