अनंत जीवन जीने के बजाय इंसानों को अपने सीमित समय को बेहतर तरीके से बिताने पर ध्यान देना चाहिए। यह कहना है ब्रिटिश फिजिसिस्ट जिम अल-खलीली का। अपने इस कथन के साथ उन्होंने टेक अरबपतियों द्वारा हमेशा जीने की कोशिशों पर सवाल भी उठाया है।
अंतर्राष्ट्रीय मीडिया के मुताबिक़, जिम अल-खलीली का कहना है कि हमेशा ज़िंदा रहने की कोशिश कर रहे टेक अरबपति (tech billionaires) अपना समय बर्बाद कर रहे हैं। साथ ही खलीली ने टेक अरबपतियों की अमरता पाने की कोशिश पर सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि लोगों को अपने सीमित समय का ज़्यादा से ज़्यादा फ़ायदा उठाने पर ध्यान देना चाहिए।
‘द गार्डियन’ को दिए एक इंटरव्यू में अल-खलीली ने कहा कि जो लोग बुढ़ापे को रोकने की कोशिश में बहुत ज़्यादा समय और पैसा खर्च करते हैं, वे शायद उस समय की अहमियत को नहीं समझ पा रहे हैं जो उनके पास पहले से है।
खबर के मुताबिक़, कुछ अमीर लोग बुढ़ापे की प्रक्रिया को धीमा करने वाले इलाज और प्रयोगों का सहारा ले रहे हैं। उदाहरण के लिए, टेक एंटरप्रेन्योर ब्रायन जॉनसन ने पहले अपने 17 साल के बेटे का प्लाज़्मा अपने शरीर में लगवाने की कोशिश की थी, हालाँकि बाद में उन्होंने कहा कि उन्हें इससे कोई फ़ायदा नहीं हुआ।
अल-खलीली ने अपनी बात में कहा कि ब्रह्मांड में इंसानों के पास बहुत कम समय होता है। उन्होंने कहा, “ब्रह्मांड में हमारे अस्तित्व का समय सीमित है। और मैं समय की प्रकृति के बारे में जितना ज़्यादा पढ़ता हूँ और सोचता हूँ, मुझे उतना ही एहसास होता है कि मैं बस अपने पास मौजूद समय का ज़्यादा से ज़्यादा फ़ायदा उठाना चाहता हूँ।”
आगे उन्होंने कहा कि, “ब्रह्मांड की उम्र की तुलना में हम यहाँ पलक झपकने भर के समय के लिए हैं। अगर मैं उस पलक झपकने भर के समय को दो बार पलक झपकने जितना बढ़ाने की कोशिश में लगा दूँ, तो मुझे नहीं लगता कि अपनी ज़िंदगी का समय इस काम में लगाना कोई फ़ायदेमंद बात होगी।”
मीडिया रिपोर्ट बताती हैं कि अल-खलीली को बचपन से ही समय की प्रकृति में दिलचस्पी रही है। उन्होंने बताया कि उनके पिता जो एक इंजीनियर थे, ने एक बार उनसे कहा था कि असल में कोई नहीं जानता कि समय क्या है।
आगे वह कहते हैं, ”एक फिजिसिस्ट के तौर पर ट्रेनिंग लेने के बाद ही आपको एहसास होता है कि समय की हमारी आम समझ, असल में उस सोच से बहुत अलग है जो हम खास तौर पर फ़िज़िक्स में समय के बारे में रखते हैं।”
इस बातचीत के दौरान उन्होंने कहा, “अगर मैं रॉकेट में अपनी घड़ी लेकर आपके पास से गुज़रूँ, तो जिसे मैं एक सेकंड कहूँगा, वह आपके लिए एक सेकंड से ज़्यादा लंबा समय होगा। मैं कहूंगा, देखो, एक सेकंड बीत रहा है। और आप कहेंगे, नहीं, असल में पांच सेकंड बीत चुके हैं। आप सब कुछ स्लो मोशन में कर रहे हैं।”
आगे वह ग्रेविटी (गुरुत्वाकर्षण) का भी समय के बीतने के असर पर कहते हैं- “मेरे लिए यह बात सबसे रोमांचक है कि ग्रेविटी कितनी मज़बूत है, इस आधार पर समय अलग-अलग रफ़्तार से चलता है।”
टाइम ट्रैवल
जिम अल-खलीली ने बताया है कि वह समय के एक बड़े रहस्य पर भी बात करेंगे यानी समय का सिर्फ़ एक ही दिशा में गुज़रना। उनका कहना है कि समय की इस दिशा के लिए उन्हें एक साइंटिफिक वजह मिली है, जिसे वह रॉयल इंस्टीट्यूशन के क्रिसमस लेक्चर में पेश करने का प्लान बना रहे हैं।
बताते चलें कि अल-खलीली इस साल ‘रॉयल इंस्टीट्यूशन’ में समय के विषय पर क्रिसमस लेक्चर देंगे। अखबार के अनुसार, अल-खलीली यह भी समझाएँगे कि कैसे अल्बर्ट आइंस्टीन की थ्योरी ने समय के बारे में हमारी समझ को बदल दिया।
अल-खलीली अपने क्रिसमस लेक्चर के दौरान टाइम ट्रैवल पर भी चर्चा करने की योजना बना रहे हैं। उन्होंने कहा कि गणितीय रूप से, कुछ खास स्थितियों में समय में पीछे की ओर यात्रा करना मुमकिन है।
अल-खलीली कहते हैं, “गणितीय रूप से, समय में पीछे की ओर यात्रा करना मुमकिन है।” उन्होंने इस विचार की तुलना एक ऐसे रोलरकोस्टर से की जो आगे बढ़ता है लेकिन किसी तरह घूमकर अपने शुरुआती बिंदु पर वापस आ जाता है।
उन्होंने कहा, “आप रोलरकोस्टर पर आगे बढ़ रहे होते हैं, लेकिन असल में आप घूमकर वापस उसी जगह आ जाते हैं जहाँ से आपने शुरुआत की थी। उनके अनुसार, टाइम ट्रैवल के साथ भी कुछ ऐसा ही होता है। रिलेटिविटी में जिसे ‘क्लोज्ड टाइम-लाइक कर्व’ कहा जाता है, वह स्पेस-टाइम में एक ऐसी जगह होती है जो ग्रेविटी की वजह से इतनी मुड़ी हुई और टेढ़ी-मेढ़ी होती है कि आप जिसे समय में आगे बढ़ना समझते हैं, असल में आप स्पेस-टाइम में घूमकर उस पल में वापस आ जाते हैं जब आपने शुरुआत की थी।”
“उनके अनुसार, समस्या यह है कि ज़्यादातर भौतिक विज्ञानी सोचते हैं कि ‘यह तो नामुमकिन है’, क्योंकि अतीत में टाइम ट्रैवल करने से कई तरह के विरोधाभास (पैराडॉक्स) पैदा होते हैं।