लखनऊ नगर निगम को इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ खंडपीठ द्वारा महत्वपूर्ण निर्देश दिए गए हैं। अब नगर निगम की बाहरी सीमा से पांच किलोमीटर के दायरे में स्थित सभी ईंट-भट्टों का सर्वेक्षण किया जाएगा। यह आदेश न्यायमूर्ति राजन रॉय और न्यायमूर्ति अबधेश कुमार चौधरी की खंडपीठ ने जनहित याचिका पर दिया।

हाईकोर्ट की लखनऊ पीठ ने नगर निगम को यह निर्देश दिया है। प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के अधिकारियों के साथ मिलकर यह काम किया जाएगा। इसके तहत उन जिम्मेदार अधिकारियों को नामित किया जाएगा, ताकि प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के अधिकारियों के सहयोग से नगर निगम की बाहरी सीमा से पांच किलोमीटर के दायरे में स्थित सभी ईंट-भट्टों का सर्वेक्षण किया जा सके। यह आदेश न्यायमूर्ति राजन रॉय और न्यायमूर्ति एके चौधरी की खंडपीठ ने वर्ष 2010 में दुर्गेश कुमार सिंह द्वारा दायर एक जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए दिया।
इसके तहत जो जानकारी जमा की जाएगी उसमे सर्वेक्षण और हलफनामा सर्वेक्षण के बाद ईंट-भट्टों की स्थापना की तिथि के अलावा अनुमति की स्थिति भी शामिल है। इसके अलावा संबंधित वैधानिक प्राधिकारियों की ओर से दी गई स्वीकृतियों का विवरण हलफनामे पर प्रस्तुत किया जाने के आदेश भी दिए गए हैं। बताते चलें कि यह आदेश न्यायमूर्ति राजन रॉय और न्यायमूर्ति अबधेश कुमार चौधरी की खंडपीठ ने जनहित याचिका पर दिया।
खंडपीठ ने स्पष्ट किया है कि ईंट-भट्टों के संचालन की अनुमति की अवधि पांच वर्ष है। नियम, 2012 के अधिसूचित होने के बाद, ऐसे ईंट-भट्टों के संचालन की अनुमति के नवीनीकरण पर विचार ज़रूरी है।
कोर्ट के मुताबिक़, उत्तर प्रदेश ईंट-भट्टा नियमावली, 2012 के अनुसार नगर निगम की बाहरी सीमा से पांच किलोमीटर के दायरे के भीतर ईंट-भट्टों की स्थापना प्रतिबंधित है। बताते चलें कि यह नियम 27 जून 2012 से प्रभावी है। इसमें संचालन की अनुमति की अवधि पांच वर्ष के लिए दी जाती है। इस मामले की अगली सुनवाई 25 फरवरी को होनी है।











